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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 20, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सरकारी प्रेस ब्रीफिंग में सांकेतिक भाषा के दुभाषियों की मांग, सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई याचिका

By Dhyanendra Singh ChauhanEdited By:
Published: Sat, 20 Nov 2021 04:33 PM (IST)

कोरोना महामारी के संबंध में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव की टेलीविजन पर दैनिक उपस्थिति थी। याचिका में कहा ...और पढ़ें

विकलांगता अधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता एम कर्पगम ने दायर की थी याचिका
विकलांगता अधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता एम कर्पगम ने दायर की थी याचिका

नई दिल्ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर केंद्र और राज्य सरकारों को सरकार द्वारा आयोजित सभी आधिकारिक प्रेस वार्ताओं में सांकेतिक भाषा के दुभाषिए उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की गई है। दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ता और वकील एम कर्पगम द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआइएल) में कहा गया है कि भारत में आयोजित सभी प्रेस ब्रीफिंग न तो समावेशी हैं और न ही सुलभ हैं। इसके बावजूद ये प्रेस ब्रीफिंग देश में विभिन्न विकास परियोजनाओं के बारे में आम जनता के बीच जागरूकता पैदा करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।

याचिका में कहा गया है कि प्रधानमंत्री, केंद्र सरकार के अन्य मंत्रियों, सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों की प्रेस वार्ता के दौरान सांकेतिक भाषा के दुभाषियों का इंतजाम किया जाना चाहिए। यह दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप होगा। इसमें कहा गया है कि सांकेतिक भाषा सुनने या बोलने में अक्षम लोगों को दुनिया के अन्य लोगों के साथ संपर्क के लिए पुल का काम करती है।

इसमें तर्क दिया गया कि इस तथ्य के बावजूद कि ये प्रेस ब्रीफिंग देश में विभिन्न विकासों के बारे में आम जनता के लिए जागरूकता और शिक्षा पैदा करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि सुनने में अक्षम व्यक्तियों के लिए सांकेतिक भाषा तक पहुंच संचार बाधाओं को तोड़ने और किसी और की तरह समाज में भाग लेने की कुंजी है।

कोरोना महामारी के संबंध में प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव की टेलीविजन पर दैनिक उपस्थिति थी। याचिका में कहा गया है कि इन सभी समाचार ब्रीफिंग में चरम के दौरान भी इन-फ्रेम सांकेतिक भाषा के दुभाषिए उपलब्ध नहीं थे। महामारी की जहां जानकारी आवश्यक थी।

दलील में कहा गया है कि संयुक्त राज्य और यूनाइटेड किंगडम सहित दुनिया भर के देशों ने प्रेस ब्रीफ के दौरान विशेष रूप से चल रहे कोरोना महामारी के दौरान इन-फ्रेम सांकेतिक भाषा दुभाषियों को उपलब्ध कराने के लिए लगातार इसे आवश्यक माना है।