NMC में HoD बदलने की तैयारी: हर 5 साल में बदलेगा विभाग प्रमुख, केवल प्रोफेसरों में होगा रोटेशन
राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन (NMC) मेडिकल कॉलेजों में विभाग प्रमुखों (HoD) के रोटेशन के संशोधित प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। ...और पढ़ें

NMC में HoD बदलने की तैयारी।
HighLights
NMC मेडिकल कॉलेजों में HoD रोटेशन के प्रस्ताव पर विचार।
विभाग प्रमुखों का कार्यकाल अब हर 5 साल में बदलेगा।
इस रोटेशन में केवल प्रोफेसरों को ही शामिल किया जाएगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) मेडिकल कॉलेजों में विभागों के प्रमुखों को हर 5 साल में बदलने के एक संशोधित प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। पहले इसे हर 3 साल में बदलने का प्रस्ताव था, लेकिन स्टेकहोर्डर्स से मिली राय के बाद इसमें बदलाव किया गया है।
मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के अध्यक्ष एम.के. रमेश ने TOI के बताया कि इस नए प्रस्ताव के तहत, केवल प्रोफसरों को ही रोटेशन में शामिल किया जाएगा। मई 2025 में जारी किए गए ड्राफ्ट में प्रोफेसरों के साथ-साथ योग्य एसोसिएट प्रोफेसरों को भी इसमें शामिल करने की बात कही गई थी,लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
रमेश ने बताया कि आयोग को पहले वाले प्रस्ताव पर काफी प्रतिक्रियाएं मिली थीं और स्टेकहोल्डर्स द्वारा उठाए गए अहम बिंदुओं पर विचार किया जाएगा। कुछ सुझावों में रोटेशन की अवधि 5 या 10 साल रखने की बात कही गई थी, जबकि कुछ ने अनिवार्य रोटेशन को पूरी तरह खत्म करने का सुझाव भी दिया था।
मूल प्रस्ताव में 3 साल में HoD का पद बदलाव
'पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस, 2023' के मूल ड्राफ्ट में यह प्रस्ताव था कि सीनियरिटी के आधार पर हर 3 साल में योग्य प्रोफेसरों और एसोसिएट प्रोफेसरों के बीच HoD का पद बदला जाए। इस ड्राफ्ट के जारी होने के लगभग डेढ़ साल बाद भी यह प्रस्ताव अभी तक तय नहीं हो पाया है।
रमेश ने कहा कि इस प्रस्ताव पर फिर से काम करने की जरूरत है और जल्द ही एक संशोधित ड्राफ्ट पेश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक बार प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे 6 सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि NMC इस संशोधित प्रस्ताव पर स्टेकहोल्डर्स से फिर से राय मांगेगा या पहले मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर ही कोई फैसला लेगा।
प्रस्ताव पर बोर्ड के विचारों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी
इस देरी के कारण, हुबली स्थित कर्नाटक मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के फार्माकोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एएन दत्तात्री ने एक RTI आवेदन दायर किया था। उन्होंने PGMEB से स्टेकहोल्डर्स की राय और इस प्रस्ताव पर बोर्ड के विचारों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी थी।
16 सितंबर, 2026 को दिए गए जवाब में बोर्ड ने कहा कि मामला अभी विचाराधीन है और RTI एक्ट की धारा 8(1)(i) का हवाला देते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया।
इस प्रस्तावित बदलाव का असर मेडिकल कॉलेजों के विभागों में नेतृत्व के पदों के आवंटन पर पड़ सकता है। 5 साल के रोटेशन की योजना अभी केवल एक प्रस्ताव है और इसे अभी तक आधिकारिक तौर पर नोटिफाई नहीं किया गया है।
