'अब हथियार की तरह इस्तेमाल हो रहे टैरिफ', प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने जताई चिंता
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता और टैरिफ को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने पर चिंता व्यक्त की है।

अब हथियार की तरह इस्तेमाल हो रहे टैरिफ। (एएनआई)
HighLights
वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता पर पीके मिश्रा ने चिंता जताई।
टैरिफ और प्रतिबंधों का उपयोग अब आर्थिक हथियार के रूप में हो रहा है।
भारत ने ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत किया है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि टैरिफ, प्रतिबंध और निर्यात रोक अब आर्थिक नीति के उपकरण बन चुके हैं और कभी-कभी इनका इस्तेमाल हथियार की तरह भी होता है।
होर्मुज स्ट्रेट जैसे समुद्री रास्तों में रुकावट से तेल की कीमतें हजारों किलोमीटर दूर प्रभावित हो सकती हैं। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने कहा है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां अचानक आने वाले संकट का असर किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता।
युद्ध से ऊर्जा और खाद्य बाजार प्रभावित होते हैं। समुद्री रास्तों में रुकावट से कारोबार और तेल की कीमतों पर असर पड़ता है।
नई दिल्ली में पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में बोलते हुए मिश्रा ने कहा कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए ऐसे जोखिमों से निपटने की तैयारी जरूरी है। पीके मिश्रा ने कहा कि भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए पर्याप्त भंडार बनाए हैं, घरेलू उत्पादन बढ़ाया है और आयात स्रोतों में विविधता लाई है।
भारत जिन देशों से कच्चा तेल आयात करता है, उनकी संख्या 27 से बढ़कर 43 हो गई है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, भंडारण और संबंधित तकनीकों में घरेलू क्षमता बढ़ाना बाहरी झटकों से जोखिम घटाने में मदद करेगा। उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों को भी रणनीतिक महत्व का क्षेत्र बताया।
मिश्रा ने कहा कि महामारी और भू-राजनीतिक संघर्षों ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की कमजोरियां उजागर की हैं। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खुला रहते हुए अत्यधिक बाहरी जोखिम से बचना है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
