जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोयला से बिजली बनाने वाले संयंत्रों के लिए जैसे वक्त पीछे की तरफ चला गया है। जैसे चार-पांच वर्ष पहले ये संयंत्र कोयले की दिक्कत से हलकान रहते थे अब उनके समक्ष कुछ वैसे ही दिक्कतें पेश आने लगी हैं। केंद्रीय बिजली प्राधिकरण की रोजाना जारी होने वाली रिपोर्ट बताती है कि पिछले शुक्रवार तक देश की तीन दर्जन बिजली इकाइयों में कोयले का स्टाक सामान्य तौर पर रखे जाने वाले स्टाक से कम है। कम से कम 19 बिजली संयंत्र ऐसे हैं जहां कोयले की गंभीर कमी है। वैसे रेल व कोयला मंत्री पीयूष गोयल का दावा है कि उनके मंत्रालय के स्तर पर कोयले की कमी दूर करने की हर कोशिश हो रही है और अक्टूबर के पहले हफ्ते से ज्यादातर बिजली संयंत्रों को कोयले की पर्याप्त आपूर्ति होने लगेगी।

इंडो अमेरिका चैंबर ऑफ कामर्स को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि कोयले की दिक्कत को दूर करने के लिए सरकार बेहद प्रयत्नशील है। सितंबर के अंत तक या अक्टूबर के पहले हफ्ते तक देश के तमाम बिजली संयंत्रों में कोयले की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। गोयल ने कोयले की कमी के लिए राज्यों के सुस्ती भरे रवैये को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि कोयला सचिव लगातार राज्यों के सचिवों को पत्र लिख रहे हैं कि कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के लिए वे बिजली संयंत्रों पर दबाव बनाये। लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। कोयले की कमी की दूसरी वजह यह है कि मानसून व अन्य वजहों से हाइड्रो, न्यूक्लियर और अन्य स्त्रोतों से बिजली पैदावार में क्रमश: 12, 36 और 7 फीसद की कमी हुई है। इससे ताप बिजली संयंत्रों पर ज्यादा बिजली पैदा करने का दबाव बढ़ा है। इसने कोयले की मांग बढ़ा दी है जबकि संयंत्रों के पास पर्याप्त बफर स्टाक नहीं है।

दरअसल, कोयला उत्पादन वाले राज्यों में हर वर्ष मानसून के मौसम में कोयले की ढुलाई में दिक्कत होती है। इससे बचने के लिए बिजली संयंत्र पहले ही स्टाक जमा कर लेते हैं। लेकिन इस बार बिजली की मांग में खास बढ़ोतरी की संभावना नहीं होने की वजह से संयंत्रों के स्तर पर इसको लेकर ज्यादा सक्रियता नहीं दिखाई गई।

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Posted By: Gunateet Ojha

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