नई दिल्ली, आइएएनएस। कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर पंजाब और हरियाणा की सरकारों को पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश देने की मांग की गई है। हर साल सितंबर से दिसंबर के बीच इन राज्यों में पराली जलाई जाती है। सरकार ने पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई को लेकर चेताया भी है, लेकिन इसके बावजूद भी किसानों को न तो सरकार के आदेशों और न ही महामारी की परवाह है।

याचिका में कहा गया है कि इस साल वायु प्रदूषण बढ़ा तो कोरोना की वजह से मृत्यु दर में तेजी से वृद्धि होगी। कानून के छात्र अमन बांका और 12वीं के छात्र आदित्य दुबे ने अधिवक्ता निखिल जैन के जरिये यह याचिका दाखिल की है। उनका कहना है, यह रिकॉर्ड पर है कि दिल्ली के वायु प्रदूषण में पराली जलाने से उठने वाले धुएं का योगदान 40 फीसद तक होता है।                                                                                                    

याचिका में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन का हवाला दिया गया है जिसके मुताबिक कोरोना संक्रमण के हलके मामलों को गंभीर मामलों में तब्दील करने में वायु प्रदूषण अहम कारक साबित हो सकता है। उन्होंने लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्ययन का हवाला भी दिया है जिसके मुताबिक वायु प्रदूषण में वृद्धि कोरोना के हवाई संक्रमण को आसान बना सकती है। लिहाजा, दिल्ली-एनसीआर में इस साल वायु प्रदूषण के स्तर में किसी भी तरह की वृद्धि से कोरोना के कारण मृत्यु दर में तेजी से बढ़ोतरी की वजह बनेगी।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि इस महामारी के दौरान पराली जलाने की अनुमति भयावह साबित हो सकती है। याचिका के मुताबिक, पराली जलाने का समय अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन पंजाब और हरियाणा के किसानों ने इसकी शुरुआत कर दी है और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की तस्वीरों से यह जाहिर है।

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