यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 13, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कृषि से बदलेगी देश की तस्वीर, लघु-सीमांत किसानों के खेतों से निकलेगी खुशहाली
सेमिनार में संस्था के अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह ने सभी वैज्ञानिकों का स्वागत करते हुए कृषि उद्यमिता से ग्रामीण विकास का खाका पेश किया।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र में लघु व सीमांत किसानों के खेतों से ही खुशहाली निकलेगी। लघु व छोटी जोत की कृषि समस्या नहीं है, बल्कि उसे ही अपनी ताकत बनाने की जरूरत है। इस दिशा में सरकार ने पहल भी की है। जाने-माने कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर आरबी सिंह ने कहा कि छोटे किसानों से ही ग्रामीण संपन्नता आयेगी। उन्हें सीमित संसाधनों वाली खेती करने की टेक्नोलॉजी की सख्त जरूरत है।
देश के 86 फीसद से अधिक किसान इसी श्रेणी के हैं, जिनके लिए नई नीति तैयार करनी होगी। डाक्टर सिंह जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में आयोजित 'भारतीय कृषि से बदलती भारत की तस्वीर' विषय पर आयोजित एक सेमिनार में बोल रहे थे। इसका आयोजन रॉयल विज्ञान संस्था ने किया था।
उन्होंने कहा कि किसानों की मूल समस्या उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है। पैदावार बढ़ाने से तौर तरीके से हमारे किसान अच्छी तरह वाकिफ हैं। हरितक्रांति से लेकर आज तक किसानों को सिर्फ पैदावार बढ़ाने के तरीके बताये जाते रहे, लेकिन उनकी लागत के मुकाबले उचित मूल्य का न मिलना उनकी गंभीर समस्या बन गई।
डाक्टर सिंह ने कहा कि डाक्टर कुरियन की तर्ज पर सहकारिता का सफल माडल सबके सामने है। गांव को बाजार से जोड़ने की दिशा में अब सरकार ने कारगर शुरुआत की है। लघु व सीमांत किसानों का संगठन बनाकर उन्हें मजबूत किया जा रहा है। इनमें एफपीओ बड़ा कारगर साबित हो रहा है।
छोटे किसानों को उद्यमी बनाने की जरूरत है। ग्रामीण विकास का रास्ता भी यहीं से निकलेगा। गांव को बाजार से जोड़ने के लिए सरकार ने 22 हजार ग्रामीण मंडियों को स्थापित करने का फैसला किया है।
किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में भी कई योजनाएं चालू की गई हैं। डाक्टर सिंह ने कहा कि किसानों और गैर किसानों के बीच की आर्थिक विषमता को खत्म करने की जरूरत है।
जल प्रबंधन और आवारा पशुओं से खेती को बचाने की रिपोर्ट तैयार
सेमिनार में संस्था के अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह ने सभी वैज्ञानिकों का स्वागत करते हुए कृषि उद्यमिता से ग्रामीण विकास का खाका पेश किया। जल प्रबंधन और आवारा पशुओं से खेती को होने वाले नुकसान पर भी एक रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसे सरकार को सौंपी जाएगी।
