मनीष तिवारी, नई दिल्ली। सड़कों, विशेषकर राष्ट्रीय राजमार्गों पर खतरनाक स्ट्रेच और अन्य खामियों को सही करने के मामले में कामचलाऊ रवैया नहीं चलेगा। इसका रिकार्ड रखना होगा कि किसी हिस्से में खतरे को जन्म देने वाली क्या कमी थी और इसे किस तरह ठीक किया गया है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर रोड इंजीनियरिंग के लिहाज से जो सेफ्टी एक्शन प्लान बनाया है, उसमें सुधार के फोटोग्राफ और वीडियो प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया है।

सभी सड़कों को स्थायी तौर पर दुरुस्त करने पर सरकार का जोर

सड़क निर्माण से संबंधित सभी एजेंसियों के लिए पिछले दिनों बनाए गए एक्शन प्लान के अनुसार सभी राजमार्गों का रोड सेफ्टी आडिट किया जाना है।

आडिट में खतरनाक और जोखिम वाले हिस्सों के लिए दो तरह के उपचार किए जाने हैं- एक तात्कालिक और दूसरा दीर्घकालिक। मंत्रालय ऐसे स्थानों को स्थायी तौर पर दुरुस्त करने पर जोर दे रहा है। इसी क्रम में यह निर्णय लिया गया है कि सभी दीर्घकालिक और स्थायी सुधार के उपाय कांट्रैक्ट का हिस्सा होंगे तथा इन्हें संचालन और रखरखाव के चरण में भी शामिल किया जाएगा।

मंत्रालय ने नेशनल हाइवे के कम से कम पचास किलोमीटर के पांच स्ट्रेच आदर्श सेफ रोड के रूप में विकसित करने के लिए कहा है। इनमें सुधार के सभी उपायों की वीडियोग्राफी कराई जाएगी और उन्हें वेब आधारित पोर्टल में 31 मार्च तक अपलोड भी किया जाएगा। इसी तरह पांच प्रोजेक्ट स्थलों का भी चयन किया जाना है, जो आदर्श सुरक्षित कांस्ट्रक्शन जोन बनाए जाएंगे। इनके लिए उन स्थलों का चयन किया जाना है जहां तीस से 75 प्रतिशत काम हो चुका होगा।

यह पहल इसलिए अहम है, क्योंकि निर्माणाधीन प्रोजेक्ट भी अक्सर हादसे का कारण बनते हैं, क्योंकि वहां सुरक्षा के उपायों की अक्सर अनदेखी की जाती है। ऐसे स्थलों पर लाइट समेत बैरिकेड, पर्याप्त संख्या और दूरी पर ट्रैफिक डायवर्जन साइन, गहरी खोदाई के समीप सेफ्टी रेलिंग लगाना जरूरी किया गया है। इसके भी पूर्व और सुधार के बाद के फोटोग्राफिक और वीडियो प्रमाण पोर्टल पर अपलोड करने होंगे।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर लोगों की सुरक्षा और संभावित जोखिम को समाप्त करने का मामला सबसे अहम है, क्योंकि लगभग एक तिहाई दुर्घटनाएं और मौतें एनएच पर ही होती हैं, जबकि देश के कुल सड़क नेटवर्क में इनकी हिस्सेदारी मुश्किल से तीन प्रतिशत है।

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Edited By: Shashank Mishra

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