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दवा कंपनियों की मनमानी पर सरकार सख्त, महंगी दवाएं बेचने वाली फार्मा कंपनियों से ₹8,447 करोड़ की वसूली बाकी

Published: Sun, 25 Oct 2026 03:12 PM (IST)

दवा कंपनियों द्वारा तय कीमत से अधिक पर दवा बेचने के मामले में सरकार सख्त है। अब तक 8447.4 करोड़ ...और पढ़ें

दवाओं की तस्वीर (फाइल फोटो)।

दवाओं की तस्वीर (फाइल फोटो)।

HighLights

  1. दवा कंपनियों से 8447.4 करोड़ रुपये की वसूली बकाया।

  2. अब तक केवल 1582.4 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके।

  3. अधिकांश बकाया राशि कानूनी विवादों में फंसी हुई है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दवा कंपनियों ने मनमानी करते हुए तय कीमत से ज्यादा पर दवा बेची। सरकार इनसे रकम वसूलने की कोशिश में है। इस प्रकिया में 8447.4 करोड़ रुपये में से 1582.4 रुपये ही वसूले गए हैं। दवा कंपनियों पर लगाम लगाने की सरकार की कोशिश जारी है।

सरकार ने अब तक मात्र 16 फीसदी तक ही वसूल पाई है, 84 फीसदी बकाया है। बचे हुए पैसों में से 5800 रुपये से ज्यादा कानूनी विवादों में फंस गया है। करीब 200 करोड़ रुपये की वसूली जिलाधिकारियों के जरिए होगी। इस बाबत उनको ये मामले भेजे गए हैं। वहीं, 2,369.3 करोड़ की वसूली की प्रक्रिया जारी है।

कौन करता है दवा कंपनियों की निगरानी

सरकारी संस्था एनपीपीए  (राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण) दवाओं की कीमतों पर नजर रखती है। दवाओं की अधिकतम कीमत तय करने का काम ये करती है। अगर कोई कंपनी तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूल करती हैं, तो प्राधिकरण अतिरिक्त रकम ब्याज सहित देने का निर्देश जारी करता है।

दवाओं पर खर्च होती है बड़ी रकम

अस्पताल में अगर कोई भर्ती होता है तो उसे सबसे ज्यादा पैसे दवा पर खर्च करना होता है। खर्च में दवाओं की बड़ी हिस्सेदारी होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुल इलाज के खर्च का 19 फीसदी हिस्सा, वहीं शहरी क्षेत्रों में यह 15 फीसदी के करीब होता है।

पैसे लौटाने का नहीं है नियम

दवा कंपनियां अगर ज्यादा पैसे पर दवा बेचती है तो सरकार दवा कंपनियों से अतिरिक्त पैसे वसूल करती है। हालांकि जिन मरीजों ने महंगी दवाएं खरीदीं हैं उन्हें पैसे नहीं लौटाये जाते हैं। यहां पर नियम में मरीजों को पैसे वापस करने का प्रावधान नहीं है।

क्या है दवा के दाम में बढ़ोतरी के नियम

कुछ जरूरी दवाओं की अधिकतम मूल्य सरकार खुद तय करती है। हालांकि बढ़ोतरी को लेकर बने नियम में ये 12 महीने में 10% से ज्यादा बढ़ाने का प्रावधान नहीं है। इससे मरीजों को तय सीमा से ज्यादा पैसे नहीं देने पड़ते हैं। ज्यादा वसूली करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई हो सकती है।