नीलू रंजन, नई दिल्ली। खाड़ी के देशों में जुटाए गए फंड को भारत लाने और छुपाकर रखने के लिए पीएफआइ ने नायाब तरीका अपनाया। लेकिन ईडी की नजरों से यह भी बच नहीं पाया। ईडी के अनुसार केरल का मुन्नार विला विस्टा प्रोजेक्ट का इस्तेमाल पीएफआइ के खाड़ी के देशों से आए फंड को छुपाने के लिए किया जाता था । ईडी ने इस प्रोजेक्ट में 22 करोड़ का फंड छुपाने के सबूत मिलने का दावा किया है। केरल एर्नाकुलम जिले में इस प्रोजेक्ट को 2018 में शुरू किया गया था और 10 एकड़ में कुल 59 विला का निर्माण होना है।

पीएफआइ का ही परियोजना है मुन्नार विला विस्टा प्रोजेक्ट

ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मुन्नार विला विस्टा प्रोजेक्ट पूरी तरह से पीएफआइ का ही प्रोजेक्ट है और इसके लिए ठोस सबूत भी है। जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए इस प्रोजेक्ट में यूएई में रहने वाले कुछ लोगों को शेयर होल्डर्स दिखाया गया है। लेकिन ईडी के अनुसार ये शेयर होल्डर्स बेनामी हैं।

आरोपियों के हाथ में था इसका देखरेख

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट की असली देखरेख अशरफ एमके और अब्दुल रजाक बीपी के हाथों में है। अशरफ एमके पीएफआइ का केरल का राज्य एक्जेक्यूटिव कौंसिल का सदस्य रह चुका है। इसके साथ ही वह मल्लापुरम के पेरुमपडाप्पू का जिला अध्यक्ष भी रह चुका है। अशरफ 2010 में केरल में एक प्रोफेसर के हाथ काटने के आरोपियों में से एक है। वहीं अब्दुल रजाक बीपी पीएफआइ का एर्नाकुलम का जिला अध्यक्ष रह चुका है। अब्दुल रजाक को पहले पीएफआइ के लिए मनी लांड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है।

मनी लांड्रिंग के जरिए छुपाये गए 22 करोड़ रुपये

ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि छह मई को लखनऊ की अदालत में पेश पूरक चार्जशीट में पीएफआइ के मुन्नार विला विस्टा प्रोजेक्ट के बार में विस्तार से जानकारी दी गई है। अदालत के सामने इस प्रोजेक्ट में 22 करोड़ रुपये मनी लांड्रिंग के छुपाये जाने के सबूत भी दिये गए हैं। अदालत इन सबूतों का संज्ञान भी ले चुका है। ईडी के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मुन्नार विला विस्टा प्रोजेक्ट का इस्तेमाल खाड़ी देशों से आने वाली करोड़ों की फंडिंग को रखने के लिए किया जाता था और बाद में जरूरत के मुताबिक उसे वहां से निकालकर इस्तेमाल किया जाता था।

पीएफआइ अबुधाबी में चलाता है रेस्टोरेंट

मुन्नार विला विस्टा प्रोजेक्ट के अलावा पीएफआइ अबुधाबी में दरबार रेस्टोरेंट भी चलाता है। ईडी के अनुसार इस रेस्टोरेंट को चलाने की जिम्मेदारी भी अशरफ एमके और अब्दुल रजाक के हाथों में है। अब्दुल रजाक का भाई दरबार रेस्टोरेंट का प्रबंधन संभालता है। ईडी के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अबुधाबी में खोले गए इस रेस्टोंरेंट का इस्तेमाल मनी लांड्रिंग के लिए किया जाता है। ईडी के पास मौजूद सबूतों के अनुसार 2012 से 2016 के बीच इस रेस्टोरेंट के माध्यम से 48 लाख रुपये भारत भेजे गए थे। उनके अनुसार फंड को मनी एक्सचेंज का इस्तेमाल कर प्रवासी भारतीय खाते में भेजा गया था।

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Edited By: Sonu Gupta

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