नई दिल्ली, प्रेट्र। एलजीबीटी समूह से संबंधित होने का दावा करने वाली कुछ चुनी हुई हस्तियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आइपीसी की धारा 377 को निरस्त करने की मांग की है। इस धारा के तहत समलैंगिकता को अपराध माना जाता है।

याचिका दायर करने वालों में रीतू डालमिया, होटल कारोबारी अमन नाथ और डांसर एनएस जौहर शामिल हैं। याचियों ने अपने यौन अधिकार के संरक्षण की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यह उनके जीने के बुनियादी अधिकार का एक अभिन्न हिस्सा है। विचार के लिए यह याचिका 29 जून को पेश की जा सकती है। ग्रीष्मावकाश के बाद सुप्रीम कोर्ट में इसी तारीख से कामकाज शुरू होगा।

अपनी याचिका में गे सेलेब्रिटी ने कहा है, 'दंड प्रावधान के कारण उनका जीवन एकदम संकीर्ण हो गया है और उनके अधिकारों का अतिक्रमण हो गया है। उनकी उपलब्धियों और भारत निर्माण में उनके योगदान के बावजूद उन्हें यौन संबंध का अधिकार नहीं दिया जा रहा है। यह बुनियादी अधिकार का आधार और सन्निहित अधिकार है। धारा 377 उन्हें अपने ही देश में अपराधी ठहराता है।'

इससे पहले मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ क्यूरेटिव याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई के लिए राजी हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट के 2013 में दिए गए फैसले पर यह क्यूरेटिव याचिका एनजीओ नाज फाउंडेशन और कुछ गे अधिकार कार्यकर्ताओं ने दायर की थी। 2 फरवरी को अदालत ने क्यूरेटिव याचिका पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ को सौंप दी थी। दो वर्ष पहले शीर्ष अदालत ने उपनिवेश काल के कानून को बहाल कर दिया था। इस कानून के तहत आइपीसी की धारा 377 के तहत समलैंगिक संबंध को अपराध माना गया है।

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By Gunateet Ojha