नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। हाल के वर्षो में भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में आये तनाव का असर बाढ़ नियंत्रण को लेकर चल रही कोशिशों पर भी पड़ा है। लेकिन गुरुवार को मोदी और देऊबा के बीच बातचीत में बाढ़ की समस्या काफी प्रमुखता से उठी। दोनो देशों की तरफ से संकेत दिए गए हैं कि वे नेपाल की नदियों की वजह से भारत में आने वाले बाढ़ पर स्थायी तौर पर काबू पाने का रास्ता खोजेंगे। इसके लिए दोनो देशों के विशेषज्ञ संयुक्त तौर पर बाढ़ से प्रभावित पूरे इलाके का दौरा करेंगे।

पीएम मोदी ने इसका संकेत देते हुए कहा कि, दोनो देशों के हितों को देखते हुए बाढ़ का स्थायी समाधान पर सोचा जाना चाहिए। इसके बाद विदेश सचिव एस जयशंकर ने बताया कि गुरुवार को भारत व नेपाल के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत में बाढ़ सबसे अहम रही। नेपाल की नदियों की वजह से अभी भी नेपाल के साथ ही बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ की तबाही मची हुई है। मोदी और देऊबा के बीच इस बात की सहमति बनी है कि इसका स्थायी हल निकाला जाएगा। बाढ़ नियंत्रण से जुड़े प्रबंधन एजेंसियों के बीच ज्यादा व्यापक सहयोग होगा। इसकी शुरुआत संयुक्त अध्ययन से होगी। यह पूछे जाने पर कि क्या नेपाल की नदियों पर बांध बनाने का मुद्दा भी उठा था तो उन्होंने जवाब दिया कि बाढ़ प्रबंधन से जुड़े हर मुद्दे पर बात हुई है।

माना जा रहा है कि जल्द ही एक उच्चस्तरीय समिति का गठन होगा। वैसे अभी भी दोनो देशों के बीच विशेषज्ञों की एक समिति काम कर रही है लेकिन मौजूदा बाढ़ की समस्या ने उसकी उपयोगिता पर सवाल उठा दिए हैं। एक अनुमान के मुताबिक नेपाल की नदियों से अभी जो बाढ़ आई है उससे दोनों देशों के तकरीबन 1.5 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं, सैकड़ों लोगों की जान गई है और खेती बाड़ी को भारी नुकसान पहुंचा है। सनद रहे कि नेपाल से निकलने वाली कोशी नदी पर बांध बनाना एक समय बिहार में बड़ा राजनीतिक मुद्दा था। पूर्व की कई राज्य सरकारों ने केंद्र से आग्रह किया है कि वह अपने पैसे से नेपाल से निकलने वाली नदियों पर बांध बनवाये। मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने एक बार यह कहा था कि बिहार सरकार अपने फंड से इस बांध को बनवाने को तैयार है।

यह भी पढ़ें: एक दूसरे पर टिके हैं भारत व नेपाल के हित : मोदी

Posted By: Manish Negi

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप