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300 की रिश्वत का मामला: पटवारी को तीन दशक बाद मिला न्याय; एमपी हाई कोर्ट ने खारिज की सरकार की अपील

Published: Thu, 01 Oct 2026 06:52 AM (IST)

मध्य प्रदेश के सागर जिले में लगभग तीन दशक पूर्व 300 रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए पटवारी मुन्ना लाल ...और पढ़ें

300 रुपये की रिश्वत के मामले में पटवारी को तीन दशक बाद मिला न्याय

300 रुपये की रिश्वत के मामले में पटवारी को तीन दशक बाद मिला न्याय

HighLights

  1. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने खारिज की सरकार की अपील

  2. जिला न्यायालय का दोषमुक्त संबंधी फैसला बरकरार रखा 

जेएनएन, जबलपुर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में लगभग तीन दशक पूर्व 300 रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए पटवारी मुन्ना लाल को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

न्यायमूर्ति संजय एस. कलगांवकर की एकलपीठ ने सरकार की अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा पटवारी को दोषमुक्त किए जाने के आदेश को सही ठहराया है।

अभियोजन के अनुसार, खुरई क्षेत्र में पदस्थ पटवारी मुन्ना लाल ने डुप्लीकेट भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका जारी करने के लिए शिकायतकर्ता वीर सिंह से 300 रुपये रिश्वत मांगी थी। 17 अक्टूबर 1996 को लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ा था।

जिला न्यायालय ने दिसंबर 1997 में उन्हें दोषमुक्त करार दिया। इस फैसले के खिलाफ सरकार ने 1998 में हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।

सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने पाया कि ट्रायल कोर्ट में मूल रिकॉर्डिंग सत्यापित नहीं हुई, और आरोपी की आवाज की पहचान भी नहीं कराई गई।

राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार शिकायतकर्ता वीर सिंह पर 325 रुपये और ब्याज की सरकारी राशि बकाया थी, जिससे यह भी संभव है कि बरामद की गई राशि सरकारी बकाया से संबंधित हो।

अभियोजन के लिए यह साबित करना जरूरी था कि रकम अवैध रूप से मांगी और स्वीकार की गई थी।

एकलपीठ ने कहा कि केवल रकम की बरामदगी और फिनाल्फ्थेलीन परीक्षण से रिश्वत मांगने का अपराध सिद्ध नहीं होता।

ट्रायल कोर्ट का दोषमुक्ति का निष्कर्ष साक्ष्यों पर आधारित और उचित है, इसलिए उसमें हस्तक्षेप का आधार नहीं है। इस टिप्पणी के साथ एकलपीठ ने सरकार की अपील निरस्त कर दी।