जागरण संवाददाता, प्रतापगढ़ । अपने मरहूम पति जियाउल हक की याद में परवीन आजाद बहुत रोई। उनके सरकारी आवास के सामने पहुंचीं तो एकाएक भावुक हो उठीं। रविवार को परवीन पति के कमरे से सामान ले जाने कुंडा आई थीं। जैसे ही सरकारी आवास का ताला खुला, वह उस कमरे की ओर बढ़ चलीं जहां पर उनके पति व उनकी बीते दिनों की याद दिलाते सामान रखे थे। आखिर कमरे में पहुुंचकर आंसू उनकी आंखों से छलक पड़े। वह लान में बैठकर 10 मिनट तक खूब रोईं। बेटी को रोते देख पिता शमसुद्दीन व भाई शोहराब के भी आंसू छलक पड़े। 15 मिनट तक परवीन अपने पिता व देवर के साथ यादों में खोई रही।

इसके बाद आवास पर झाड़ू-पोछा करने वाली को परवीन ने बुलवाया, उसका हालचाल पूछा और उसे महीने भर का वेतन 1000 रुपये दिया। करीब साढ़े चार घंटे यहां रहने के दौरान परवीन हर उस पहलू को फिर से छूने की कोशिश कर रहीं थीं जो जिया के साथ कभी उन्होंने साझा किया था।

साहब की बेगम आई हैं

परवीन के आने की खबर पर सुबह से उनके आवास के पास भीड़ जमा होनी शुरू हो गई थी। सुरक्षा के लिहाज से मुख्य गेट से ही पीएसी व पुलिस वाले तैनात थे। किसी व्यक्ति को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था। तहसीलदार को भी देर तक बाहर खड़े रहना पड़ा। वहीं मुख्य द्वार पर खड़े सैकड़ों की संख्या में बुजुर्ग व युवाओं को पीएसी व पुलिस बल की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा था। बीच-बीच में दो चार डंडे भी पड़ जा रहे थे। उत्सुक लोग कह रहे थे साहब की बेगम आईं हैं। भीड़ उन्हीं की दिलेरी की चर्चा कर रही थी। कोई कहता कि यही लड़की है जिसने सरकार को हिला दिया तो कोई उसे न्याय के लिए आवाज उठाने वाली लड़की बता रहा था।

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