नई दिल्ली। अगस्ता वेस्टलैंड के मुद्दे पर आज लोकसभा में रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने पूरा विवरण दिया। हालांकि इस दौरान कांग्रेस के सदस्यों ने सदन से वाकआउट भी किया। इसके बाद रक्षा मंत्री ने कहा कि वह सुनना ही नहीं चाहते हैं। वहीं कांग्रेस के विरप्पा मोेइली का कहना था कि पार्रिकर तथ्यों पर आधारित बयान नहीं दे रहे हैं इसलिए उन्हें वाकआउट करना पड़ा।

स्वामी पर दस्तावेज प्रमाणित करने की समय सीमा

सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए जयराम रमेश ने कहा है कि 'मै जानना चाहता हूं कि यदि सभी कागजात प्रमाणीकृत है तो वे जांच के लिए सार्वजनिक डोमेन में भी उपलब्ध होने चाहिए'। इसके बाद उपसभापति ने पी जे कुरियन ने जयराम रमेश को आश्वासन देते हुए कहा कि यदि स्वामी आज 6 बजे तक अपने दस्तावेजों को प्रमाणित नहीं करते है तो उन्होंने जो कुछ कहा है वह रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा।

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कांग्रेस पर अपने ऊपर अभिमान करने का आरोप

इससे पहले रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने लोकसभा में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए अभिमानी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये 'भ्रष्टाचार इसलिए हुए क्योंकि यूपीए सरकार ने मान लिया था कि वह हमेशा सत्ता में बने रहेंगे'। इस मामले में सीबीआई जांच कराने के विषय में रक्षामंत्री ने कहा, "सुप्रीमकोर्ट में पहले ही बहुत लंबित मामले है।इसलिए इस मामले की निगरानी सीबीआई को दी गई। हम सीबीआई के जांच में दखल नहीं दे रहे है। इस मामले में निश्चित रूप से रिश्वत की रकम को बरामद कर लिया जाएगा। इस घोटाले में कई बड़े खिलाड़ी शामिल है त्यागी तो बहुत छोटा नाम है। त्यागी सीबीआई की हिरासत में है।लेकिन वह वर्ष 2007 में सेवानिवृत्त हो चुके त्यागी इस घोटाले में बहुत छोटे खिलाड़ी है'।

बढ़ाई गई सौदे की रकम

पर्रिकर ने सदन में अपना जवाब देते हुए कहा कि टेंडर के नियमों में बदलाव करते हुए हेलीकॉप्टरों की कीमत को 6 गुना बढाया गया। रक्षामंत्री ने कहा कि UPA ने 793 करोड़ पर डील तय की थी पर बाद में 4877.5 करोड़ की डील हुई। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि बेंचमार्किंग कॉस्ट को इतना क्यों बढ़ाया गया?

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कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में किए बदलाव

उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में दो कंपनिया आखिरी चरण तक पहुंची थी और सिर्फ अगस्ता वेस्टलैंड को ही रियायत दी गई जबकि S-92 को रियायत नहीं मिली। रक्षामंत्री ने बताया कि 1999 में में डील की प्रक्रिया शुरु हुई थी और कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव किए गए। रक्षा मंत्री ने कहा कि करार कंपनी से हुआ था लेकिन चिट्ठी इटली की सरकार को लिखी गई। साथ ही यूपीए सरकार पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि ‘जो आलू की भाजी खाता है गला उसी का खराब होता है।"

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देख रहा हूं यह बहती गंगा जा कहां रही है

पर्रिकर ने कहा, "त्यागी, खेतान ने बहती गंगा में हाथ धोए, बहती गंगा कहां जा रही है ये राज्यसभा में स्पष्ट हो गया उस दिन।" उन्होंने कहा सीबीआई ने मार्च 2013 में इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली थी लेकिन इसकी कॉपी दिसंबर तक ईडी के पास नहीं भेजी गई। रक्षामंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार ने अगस्ता वेस्टलैंड को कॉन्ट्रैक्ट देने के लिए हरसंभव कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि खेतान और त्यागी तो छोटे नाम हैं, हमें उन बड़े नामों का पता लगाना है जिन्होंने घूस की रकम ली थी।

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भाजपा सरकार ने ईडी को दिए थे मामला दर्ज करने के निर्देश

पर्रिकर ने कहा कि तत्कालीन रक्षा मंत्री ने इटली के अखबारों में घोटाले की खबर आने के बाद भी कंपनी से बात करने की जहमत नहीं उठाई। बल्कि विदेश मंत्रालय के जरिए दूतावात से संपर्क करवाया। कंपनी के सीईओं के पकड़े जाने के बाद आनम-फानन में यूपीए सरकार ने जांच के आदेश दिए। जबकि ईडी को कारर्वाही करने के लिए काफी समय बाद में आदेश मिले। 12 मई 2014 को एग्जिट पोल आने के बाद ही तत्कालीन रक्षा मंत्री ने घोटाले को लेकर 12 पेज का नोटिस जारी किया। हालाकि वित्तमंत्री अरुण जेटली के रक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद ईडीनिदेशक को मनी लांडरिंग का केस दर्ज करने के आदेश दे दिए गए थे।

रक्षा मंत्री के समर्थन में खड़े हुए अनुराग ठाकुर ने कहा की सदन में ‘दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।’

ज्योतिरादित्य ने किया बचाव

वहीं कांग्रेस के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोनिया गांधी का बचाव करते हुए सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हमने आज ये देखा कि भाजपा की गलत आरोप लगाने की आदत बन गई है। और हम इससे साफ साबित होंगे। यह डील एनडीए की सरकार में हुई थी ना कि हमारी सरकार में।

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ज्योतिरादित्य ने कहा,’ सोनिया गांधी का नाम सुनते ही डर जाते हैं क्योंकि शेरनी है ये। और शेरनी को कुरेदोगे तो अंजाम जानते हो। पिछले दो साल में एनडीए सरकार ने नारे लगाने के अलावा क्याे किया।’

(एएनआई इनपुट्स के साथ जेएनएन)

Posted By: kishor joshi

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