विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'बुलेट ट्रेन के पुर्जों में आत्मनिर्भरता बढ़ाए रेलवे', संसदीय समिति ने मंत्रालय से की सिफारिश

Published: Tue, 11 Aug 2026 01:58 AM (IST)Updated: Tue, 11 Aug 2026 07:06 AM (IST)

संसद की रेलवे संबंधी स्थायी समिति ने बुलेट ट्रेन के पुर्जों के निर्माण में देश की क्षमता बढ़ाने और हाईस्पीड ...और पढ़ें

बुलेट ट्रेन (सांकेतिक तस्वीर)

बुलेट ट्रेन (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. बुलेट ट्रेन पुर्जों के निर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की मांग।

  2. हाईस्पीड रेल प्रशिक्षण अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता से मजबूत करने की सिफारिश।

  3. मुंबई-अहमदाबाद परियोजना में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिला।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद की रेलवे संबंधी स्थायी समिति ने बुलेट ट्रेन के पुर्जों के निर्माण में देश की क्षमता बढ़ाने और हाईस्पीड रेल के लिए घरेलू तकनीक विकसित करने के प्रयासों की जानकारी रेलवे मंत्रालय से मांगी है।

समिति ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता के जरिये हाईस्पीड रेल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी मजबूत करने की सिफारिश की है। सोमवार को संसद में पेश अपनी 10वीं रिपोर्ट में समिति ने कहा कि भारत को उन देशों के सफल हाईस्पीड रेल नेटवर्क का व्यापक अध्ययन करना चाहिए, जहां ऐसी सेवाएं बेहतर तरीके से संचालित हो रही हैं।

समिति ने रेलवे के इस कमद की सराहनी की

समिति ने मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के रेलवे के कदम की सराहना की। 508 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के पहले चरण में सूरत से वापी के बीच 97 किलोमीटर के खंड पर अगस्त 2027 में सेवा शुरू करने की तैयारी है। रेलवे जापान की ई10 सीरीज शिंकानसेन की तकनीकी जानकारी सीमित होने के कारण भारत में बी28 नाम से स्वदेशी बुलेट ट्रेन विकसित कर रहा है, जिसकी डिजाइन गति 280 किलोमीटर प्रति घंटा है।

रिपोर्ट में हाईस्पीड रेल प्रशिक्षण संस्थान, वडोदरा में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाने और हाईस्पीड रेल के पुर्जों के स्वदेशीकरण की रफ्तार बढ़ाने को कहा गया है।

बजट 2026-27 में क्या सिफारिश की गई थी

बजट 2026-27 में घोषित सात नए कारिडोर के लिए भी विदेशी हाईस्पीड नेटवर्क के संचालन और बेहतर तौर-तरीकों का अध्ययन करने की सिफारिश की गई है। इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं।

समिति ने अमृत भारत स्टेशन पुनर्विकास योजना के तहत विकसित स्टेशनों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए भी एक तय ढांचा बनाने को कहा है। इसमें यात्रियों की संख्या, सुविधाओं का इस्तेमाल, दिव्यांगों की पहुंच, सफाई, व्यावसायिक स्थानों का उपयोग और यात्री प्रतिक्रिया जैसे मानक शामिल करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, माल ढुलाई टर्मिनलों के प्रदर्शन की निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड विकसित करने की सिफारिश की गई है।