'सिविल सेवा की तर्ज पर हो NEET-UG की परीक्षा', संसदीय समिति ने दिया सुझाव
संसदीय समिति ने नीट पेपर लीक के बाद एनटीए को नीट-यूजी परीक्षा को सिविल सेवा परीक्षा की तर्ज पर दो चरणों में कराने का सुझाव दिया है।
-1791634813197_m.webp)
नीट-यूजी परीक्षा को दो चरणों में कराने का सुझाव (सांकेतिक तस्वीर)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) जब परीक्षाओं से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को और सख्त बनाने में जुटी है, ऐसे में कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक की अगुवाई वाली संसदीय समिति ने नीट-यूजी परीक्षा को दो चरणों में कराने के सुझाव दिए हैं। एनटीए से भी कहा है कि वह इसकी व्यवहार्यता का परीक्षण कराए।
समिति ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा जहां अपने अभ्यर्थियों के चयन के लिए बहुस्तरीय परीक्षा प्रणाली का अनुसरण करती है, वहीं इसके विपरीत नीट यूजी की परीक्षा अब भी एकल स्तरीय परीक्षा प्रणाली से आयोजित की जाती है। यह बात अलग है कि इस बदलाव से अब तक सिर्फ एक परीक्षा के जरिए मेडिकल कोर्सों में दाखिला पाने वाले छात्रों को दो परीक्षाएं देनी पड़ेंगी।
समिति ने जो सुझाव दिए हैं, उसमें कहा है कि सभी मेडिकल कोर्सों के लिए एक सामान्य प्रारंभिक परीक्षा कराई जाए और इसके बाद विभिन्न विशिष्ट कोर्सों के लिए अलग-अलग मुख्य परीक्षा आयोजित की जा सकती है, ताकि नर्सिंग अथवा आयुष कोर्सों में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थियों का मूल्यांकन व रैंकिंग एमबीबीएस में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थियों से पृथक रूप से की जा सके।
इससे अनावश्यक प्रतिस्पर्धा में कमी भी आएगी। मौजूदा समय में एनटीए इंजीनियरिंग कोर्सों में दाखिले से जुड़ी परीक्षा जेईई को दो चरणों में कराती है। एक जेईई मेन व दूसरा जेईई एडवांस होता है। समिति ने परीक्षा के दिन आयोजित होने वाली सार्वजनिक रैलियों, जुलूस जैसे बड़े आयोजनों को अनुमति नहीं दिए जाने का भी सुझाव दिया है।
कहा है कि परीक्षा के दिन सुचारु यातायात व कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए, ताकि छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में विलंब का सामना न करना पड़े।
उचित कारणों पर देरी से पहुंचने वालों को परीक्षा की दी जाए अनुमति
समिति ने परीक्षा में उचित कारणों के चलते देरी से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने के बारे में एनटीए से विचार करने के लिए कहा है। यह भी कहा है कि वह ऐसे छात्रों को बाकी बचे समय के लिए परीक्षा में शामिल होने का मौका दे सकते है।
हालांकि, इससे पहले अभ्यर्थियों से एक वचन पत्र लेने का भी सुझाव दिया है। समिति का मानना है कि दो से पांच मिनट की देरी पर परीक्षा में न बैठने देने से उस छात्र का पूरा वर्ष खराब हो जाता है, क्योंकि वह साल से उसी परीक्षा के इंतजार में रहता है।
समिति ने यह भी दिए अहम सुझाव
परीक्षाओं के सुरक्षा प्रोटोकाल का आडिट व अभ्यर्थियों की शिकायतों की जांच करने के लिए एनटीए से अलग एक स्वतंत्र तंत्र बनाया जाए। जो अपनी रिपोर्ट सीधे मंत्रालय को दें।
परीक्षा में शामिल होने वाले राज्य सरकार और अन्य एजेसियों व हितधारकों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए एनटीए को निवेश करना चाहिए। ताकि सुधारों पर केवल अनुपालन करने के बजाय उन्हें आत्मसात किया जा सके।
