जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश में खेल प्रशिक्षकों की भारी कमी पर संसदीय स्थायी समिति ने गंभीर चिंता जताई है। खिलाड़ियों को शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए समिति ने आवासीय स्पोर्ट्स स्कूल खोलने की सिफारिश की है, जिससे ज्यादातर खिलाड़ी वंचित रह जाते हैं। हाल के वर्षो में अपने खेलों में सफलता प्राप्त करने वाले खिलाडि़यों के पीछे उनकी व्यक्तिगत पहल और प्राइवेट प्रशिक्षक रहे हैं।

राज्यसभा में बृहस्पतिवार को मानव संसाधन मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति ने 'खेलो इंडिया' योजना पर अपनी रिपोर्ट पेश की। सत्यनारायण जटिया की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यों की समिति ने विस्तार से खेलों में किये जा रहे प्रयासों को नाकाफी बताया है। समिति ने वैश्विक स्तर पर घरेलू खिलाडि़यों की धमक बनाने के उपाय भी सुझाये हैं।

जटिया की अध्यक्षता वाली समिति ने पाया कि देश में खेलों के लिए बुनियादी सुविधाएं बहुत संतोषजनक नहीं हैं। इसके लिए प्राइवेट सेक्टर को खेल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में प्रोत्साहित करने की समिति ने सिफारिश की है। समिति का कहना है कि खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और उसकी गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र काफी मुफीद साबित हो सकता है। खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए पब्लिक-प्राइवेटपार्टनरशिप मॉडल को अपनाना होगा। खेल क्षेत्र में क्वालिटी को बढ़ाने, बेहतर प्रशिक्षण और हुनरमंद खिलाडि़यों की तलाश के लिए प्राइवेट स्पोटर््स एकेडमी को दायित्व सौंपना होगा।

संसद की स्थायी समिति ने खेल मंत्रालय को उड़ीसा के खेल मॉडल को अन्य राज्यों में अपनाने का सुझाव दिया है। उड़ीसा की राज्य सरकार ने कारपोरेट सेक्टर से हाथ मिलाकर 10 उच्च स्तरीय बैंडमिंटन व शूटिंग सेंटर स्थापित किया है, जिसके उत्कृष्ट नतीजे मिलने लगे हैं।

देश में खेल प्रशिक्षकों की भारी कमी पर चिंता जताते हुए समिति ने बताया कि फिलहाल मंजूर 1524 पदों में से 544 प्रशिक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं। इन 36 फीसद पदों को भरने की जल्दी नहीं दिख रही है, जो गंभीर विषय है। समिति ने इन पदों को तत्काल भरने की सिफारिश की है।

संसदीय समिति ने स्पोर्टस क्षेत्र के होनहार खिलाडि़यों की बेसिक शिक्षा पर जोर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खेलों में कड़ी मेहनत और व्यवस्तता के चलते उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होती है, जिससे बचने के लिए स्पोटर््स कांप्लेक्स के साथ आवासीय शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने की सिफारिश की गई है। चुने गये तमाम खिलाड़ी कई बार शिक्षण की व्यवस्था न होने की वजह से स्पोर्ट्स को छोड़ने के लिए बाध्य हो जाते हैं।

वर्ष 2018-19 में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कुछ खिलाडि़यों ने कई खेलों में बेहतरीन व उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। समिति ने पाया कि इसका श्रेय सरकारी खेल नीति और सरकारी खेल प्रशिक्षकों के बजाय निजी प्रयास और निजी प्रशिक्षक रहे। समिति ने खेलो इंडिया जैसी योजना की सफलता के लिए अच्छा प्रशासक अथवा खिलाड़ी की नियुक्ति की सिफारिश की है, जो खेल और खिलाड़ियों की जरूरत को समझे और सुलझा सके।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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