नई दिल्ली। अब मकान और फ्लैट बनाकर देने में देरी करना बिल्डरों के लिए महंगा पड़ेगा। ग्राहकों को पजेशन देने में देरी पर सख्त प्रावधान वाला रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) बिल 2013 को लोकसभा से पुन: मंजूरी मिलने के बाद इसके कानून बनने का रास्ता साफ हो गया है। इसमें नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने के अलावा तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।

राज्यसभा में इस बिल को पांच दिन पहले मंजूरी मिली थी लेकिन चूंकि इसमें कुछ संशोधन किए गए थे इसलिए इसे दुबारा लोकसभा में पारित कराया गया। सरकार ने कहा कि इस बिल में ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिससे प्रॉपर्टी खरीदने वाले ग्राहकों के हितों की रक्षा हो सके। प्रॉपर्टी संबंधी लेनदेन में पारदर्शिता लाने, बिल्डरों को जवाबदेह बनाने और निवेश आकर्षित करने के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं।

मौजूदा प्रोजेक्ट भी दायरे में

इस बिल के तहत राज्यों में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा। ये अथॉरिटी प्रोजेक्ट समय पर पूरा होना और पजेशन दिलवाना सुनिश्चित करेंगी। इससे रेजीडेंशियल और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट संबंधित ट्रांजेक्शन रेगुलेट होंगे। रेजीडेंशियल और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट का इसके तहत अनिवार्य रूप से पंजीयन करवाना होगा। यह कानून मौजूदा और नए प्रोजेक्टों पर लागू होगा।

शिकायतें 60 दिन में दूर होंगी

रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल भी बनाए जाएंगे जो 60 दिन के भीतर मामलों का निपटारा करेंगे। पहले 90 दिन की समय सीमा रखी गई थी। रेगुलेटरी अथॉरिटी को शिकायतों का निपटारा 60 दिन में करना होगा। पहले वाले बिल में शिकायतों के निपटारे के लिए कोई समय तय नहीं किया गया था। बिल में अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेशों के उल्लंघन पर प्रमोटरों को अधिकतम तीन साल और एजेंटों व खरीदारों को एक साल तक की सजा या जुर्माने या दोनों का प्रावधान है।

शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने बिल पर बहस के जवाब में कहा कि बिल्डर क्या वायदा कर रहे हैं, उन्हें पूरा करना होगा। विज्ञापनों के जरिये वे जो बातें कहते हैं, उन्हें हर हाल में निभाना होगा, इस कानून का मकसद यही है।

वायदे पूरे करें बिल्डर

नायडू ने राज्यों से अपील की कि वे इस विधेयक को सफल बनाने के लिए जल्द से जल्द आवश्यक कदम उठाएं। इसके प्रावधान राज्यों से पिछले सभी कानूनों के स्थान पर प्रभावी होंगे। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि बिल्डरों द्वारा दिए जाने वाले आकर्षक विज्ञापन और उनमें किए गए वायदे उनके लिए बाध्यकारी हों और वे पूरे किए जाएं। हमारा प्रयास है कि प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा हो। बिल जब कानून के रूप में अधिसूचित हो जाएगा, रियल एस्टेट सेक्टर में ज्यादा निवेश होगा।

कीमतों में कमी संभव

प्रोजेक्टों को जल्दी मंजूरी मिलेगी और प्रॉपर्टी की कीमतों में कमी आएगी। बिल के चलते रियल एस्टेट में तेज विकास होगा विदेशी निवेशकों के अलावा प्राइवेट स्तर पर लोग निवेश के लिए आगे आएंगे।

रेंटल हाउसिंग पॉलिसी जल्द

उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय शहरी रेंटल हाउसिंग पॉलिसी भी लाने का प्रयास कर रही है। इसमें किराएदारों की मौजूदा दिक्कतें दूर करने के लिए आवश्यकताओं पर ध्यान रखा जाएगा।

Posted By: Sachin Bajpai

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