रायपुर [मृगेंद्र पांडेय]। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 (Article 370) खत्म किए जाने से बौखलाया पाकिस्तान हर तरीके से भारत को घेरने का प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान कभी भारत के इस फैसले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चुनौती दे रहा तो कभी इंटरनेशनल कोर्ट में चुनौती देने की धमकी देता है। इतना ही नहीं पाकिस्तान, भारत को युद्ध और परमाणु हमले की भी धमकी दे चुका है। हर चाल नाकाम होने के बाद पाकिस्तान ने अब अपनी मीडिया के जरिए भारत के खिलाफ छद्म युद्ध शुरू कर दिया है। पाकिस्तान, कश्मीर में हिंसा की झूठी खबरें फैला रहा है।


पाकिस्तानी मीडिया में दिखाया जा रहा ये Fake Video, जो सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा।

पाकिस्तानी मीडिया में सोमवार को पूरे दिन और मंगलवार को कश्मीर में हुई एक हिंसा का फर्जी वीडियो खूब दिखाया गया। इसमें दावा किया गया कि हिंदूवादी संगठन और आरएसएस के लोग अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद वर्दी में कश्मीर में हिंसा कर रहे हैं। इन लोगों को कथित तौर पर स्थानीय लोगों के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं पाकिस्तानी मीडिया ने झूठ की सभी हदें पार कर ये भी दावा कर दिया कि कश्मीर में स्थानीय लोगों पर अत्याचार कर रहे 170 गुंडों की भगवा वर्दी में लाशें भी मिली हैं। ऐसे ही झूठे फोटो और वीडियो के आधार पर पाकिस्तान, भारत की छवि खराब करने का प्रयास कर रहा है। पहले भी पाकिस्तान कई बार भारत के खिलाफ ऐसी झूठी तस्वीरों और वीडियो को यूएनएससी समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आधिकारिक रूप से पेश कर मुंह की खा चुका है। बावजूद पाकिस्तान ने इससे कोई सबक नहीं लिया।

पाकिस्तानी नेता, अधिकारी व सेलिब्रिटीज भी साजिश में शामिल
खास बात ये है कि भारत के खिलाफ फैलाए जा रहे झूट में केवल पाकिस्तानी मीडिया ही शामिल नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के बड़े नेता, अधिकारी और सेलिब्रिटीज भी इस प्रोपेगेंडा में लगे हुए हैं। इनका केवल एक उद्देश्य है कि भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय मंच पर खराब की जाए और कश्मीर में बहाल हो रही शांति प्रक्रिया को किसी भी कीमत पर बाधित किया जाए। पाकिस्तानी मीडिया में झूठी खबर दिखाए जाने के बाद अब इस फर्जी वीडियो को सोची-समझी साजिश के तहत सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के साथ उर्दू में कैप्शन (टिकर) भी चलाया जा रहा है।


दंतेवाड़ा नक्सली हमले में शहीद हुए जांबाजों के जंगल में रखे गए शव की फाइल फोटो।

नौ साल पुराना वीडियो दिखा रहा पाकिस्तानी मीडिया
पाकिस्तानी मीडिया में दिखाए जा रहे वीडियो की वास्तविकता ये है कि वह तकरीबन नौ साल पुराना है। पाकिस्तानी मीडिया जिस वीडियो को कश्मीर के ताजा हालातों के तौर पर पेश कर रही है वह दरअसल दंतेवाड़ा नक्सली हमले का वीडियो है। ये नक्सली हमला वर्ष 2010 में हुआ था। मालूम हो कि दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में वर्ष 2010 में हुए इस नक्सली हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 76 जवान शहीद हो गए थे। नक्सली हमले के बाद जंगल में अलग-अलग लोकेशन पर शहीद हुए जवानों के शवों को सम्मानपूर्वक लाइन में एक जगह रखा गया था। पाकिस्तानी मीडिया में इन शहीद जवानों के शवों को भगवा गुंड़ों के दावे के साथ दिखाया जा रहा है। मतलब पाकिस्तान न केवल भारत के खिलाफ झूठ फैला रहा, बल्कि हमारे वीर जांबाजों की शहादत का भी अपमान कर रहा है।

बारुदी सुरंग से मारे गए थे जवान
पाकिस्तानी मीडिया में शर्मनाक दावा किया जा रहा है कि इन सभी लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर कश्मीर में भेजा गया है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि ये कश्मीर में महिलाओं के साथ दुराचार की नियत से गए थे। तीन लाख भगवा गुंडे कश्मीर में घूम रहे हैं। 30 सेकेंड के वीडियो को पाकिस्तान की सोशल मीडिया में जमकर वायरल किया जा रहा है। मीडिया में दावा किया जा रहा है कि हिंदूवादी ताकतों को वर्दी में ढेर किया गया है। बस्तर के ताड़मेटला में 6 अप्रैल 2010 को सीआरपीएफ जवान सर्चिंग के लिए निकले थे, जहां माओवादियों ने बारुदी सुरंग लगा कर 76 जवानों को मार डाला था।

वीडियो की प्रथम दृष्टया जांच में यह मिली समानता
दोनों वीडियो में जवानों की लाश के बगल में एक पेड़ दिख रहा है। जवानों को नीले रंग के मैट पर लिटाया गया है। दोनों वीडियों में समानता का ये सबसे बड़ा सबूत है। जवानों को जिस स्थान पर रखा गया है, उसके पीछे की दीवार एक जैसी है। इसके साथ ही कुछ जवानों के शव को मैट से बाहर रखा गया है, जो पाकिस्तानी मीडिया में चल रहे वीडियो में भी नजर आ रहा है। इससे पता चलता है, पाकिस्तानी मीडिया में चल रहा वीडियो फर्जी है।

नक्सलियों ने घात लगाकर किया था हमला
दंतेवाड़ा जिले के ताड़मेटला में नक्सलियों ने पैरामिलिट्री फोर्स पर घात लगाकर हमला किया था। यह सुरक्षा बलों पर किया गया देश का सबसे बड़ा नक्सली हमला था। इसमें सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे। हादसा उस वक्त हुआ था जब सीआरपीएफ के करीब 120 जवान सर्च ऑपरेशन के लिए निकले थे। सर्चिंग से वापस लौटने के दौरान एक हजार नक्सलियों ने एंबुश लगाकर जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी थी। इसमें आठ नक्सलियों की भी मौत हो गई थी। नक्सलियों ने जवानों के हथियार, जूते भी लूट लिए थे।

Posted By: Amit Singh

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