नई दिल्ली, जेएनएन। मुंबई हमले के 12 वर्ष बीत जाने के बावजूद इसके दोषियों को सजा दिलाने के लिए पाकिस्तान में शुरू की गई कानूनी प्रक्रिया एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है। पाकिस्तानी हुक्मरानों ने हमले के तुरंत बाद भारत के आरोपों के मुताबिक जांच करने की जो कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी, वह पिछले दो वर्षों से पूरी तरह से ठप है। भारत व अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से वादा करने के बावजूद पाकिस्तान की तरफ से हमले के साजिशकर्ताओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

पाकिस्तान ने ठंडे बस्ते में डाले डोजियर

इस संदर्भ में भारत की तरफ से सौंपे गए डोजियर को भी पाकिस्तान ठंडे बस्ते में डाल चुका है। जांच के लिए पाकिस्तान सरकार की तरफ से गठित आयोग की रिपोर्ट भी इस्लामाबाद स्थित आतंकरोधी अदालत में धूल फांक रही है। मुंबई हमले के दोषियों को पकड़ने व उन्हें सजा दिलाने पर भारत व पाकिस्तान के बीच पिछले पांच वर्षो में कोई बातचीत भी नहीं हुई है। दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैंकाक में वर्ष 2015 में हुई मुलाकात में अंतिम बार मुंबई हमले पर बातचीत हुई थी।

कानूनी प्रक्रिया हुई सुस्‍त

इसके कुछ ही महीने बाद भारत के पठानकोट सैन्य ठिकाने पर आतंकियों ने हमला किया था और उसके बाद रिश्ते बद से बदतर होते गए। भारत के साथ रिश्तों को बिगड़ते देख पाकिस्तान की अदालत में मुंबई हमले की साजिश रचने वालों के खिलाफ जो कानूनी प्रक्रिया चल रही थी, उसे भी सुस्त कर दिया गया। जनवरी 2019 में पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि उसे 19 गवाहों को खोजकर अदालत में पेश करने के लिए और वक्त चाहिए। उसके बाद से कोर्ट की कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं है।

हाफिज सईद के गुनाह की अनदेखी

पहले पाकिस्तानी एजेंसियों ने बताया था कि उन्होंने मुंबई हमले की साजिश रचने में शामिल सात दोषियों जकीउर रहमान लखवी, अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हमद अमीन शाहिद, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और यूनिस अंजुम समेत 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। वर्ष 2015 में लखवी को जमानत भी दे दी गई। एक दूसरे साजिशकर्ता हाफिज सईद को हाल ही में अन्य आतंकी वारदात से जुड़े मामले में 10 साल की सजा दी गई है। लेकिन मुंबई हमले में उसकी भूमिका को पाकिस्तान लगातार नजरअंदाज करता रहा है।

ठोस सबूतों को भी नकारा

पाकिस्तान की सीनाजोरी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुंबई हमले में जिन पाकिस्तानी आतंकियों को भारतीय सैन्य जवानों ने मार गिराया था, उनके डीएनए से जुड़े डोजियर को लेकर भी बात आगे नहीं बढ़ी है। भारतीय गृह मंत्रालय की तरफ से 2009 में जो डोजियर सौंपा गया था, उसमें मारे गए सभी आतंकियों के डीएनए के नमूने थे। साथ ही जिंदा पकड़ा गया आतंकी अजमल कसाब का न्यायालय के समक्ष इकबालिया बयान व उसकी आवाज का नमूना भी शामिल था।

अब प्रक्रिया ठप

इसमें अमेरिकी जांच एजेंसी की तरफ से भारतीय जांच एजेंसियों को सौंपी गई कई अन्य महत्वपूर्ण जांच रिपोर्ट भी थी। तब पाकिस्तान ने इन रिपोर्टों को पुख्ता कहते हुए इन पर शीघ्रता से कार्रवाई करने की बात कही थी। लेकिन, बाद में उसकी एजेंसियों ने अपनी अदालत में इन सुबूतों को अधूरा करार दिया। भारत से नए सुबूत भी मांगे जाते रहे। हालांकि अब यह सारी प्रक्रिया ठप है।

फिर बनाया जाए अंतरराष्ट्रीय दबाव

मुंबई हमले के पाकिस्तान में छिपे साजिशकर्ताओं को सजा मिलने की अब एक ही सूरत है कि वहां अंतरराष्ट्रीय दबाव में फिर से कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए। मुंबई हमले की 12वीं बरसी पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह भारत के साथ मिलकर मारे गए 166 निर्दोष लोगों को न्याय दिलाने के लिए आगे भी प्रयासरत रहेगा। फ्रांस, इजरायल समेत कई देशों ने गुरुवार को फिर कहा है कि 26 नवंबर, 2008 को मुंबई पर हमला करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

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