नीलू रंजन, नई दिल्ली। आतंकी फंडिंग के मामले में पाकिस्तान दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है। आतंकी फंडिंग पर लगाम लगाने के लिए बने अंतरराष्ट्रीय संगठन फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की रिपोर्ट में पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित आतंकी संगठनों व व्यक्तियों के वित्तीय लेन-देन पर रोक नहीं लगाने का दोषी पाया गया है। भारत ने एफएटीएफ में पाकिस्तान में आतंकियों को मिल रही फंडिंग का मुद्दा उठाया था।

स्पेन में 18 से 23 जून तक हुई एफएटीएफ की प्लेनरी बैठक में पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को मिल रही फंडिंग पर रिपोर्ट पेश की गई। इसमें कहा गया है कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए- मोहम्मद जैसे संयुक्त राष्ट्र संघ से प्रतिबंधित आतंकी संगठन पाकिस्तान में खुलेआम सक्रिय हैं और आर्थिक लेन-देन कर रहे हैं। पाकिस्तान इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।

सभी सदस्य देशों ने पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई का मामला इंटरनेशनल कोऑपरेशन रिव्यू ग्रुप (आइसीआरजी) को सौंप दिया। बाद में आइसीआरजी ने एशिया पैसिफिक ग्रुप (एजीपी) को एक महीने के भीतर पाकिस्तान द्वारा आतंकी फंडिंग रोकने के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट देने को कहा है। ताकि जुलाई में होने जा रही एजीपी की वार्षिक बैठक में इस पर चर्चा की जा सके।

एजीपी के रिपोर्ट नहीं देने की स्थिति में आइसीआरजी ने पाकिस्तान को सीधे उसे रिपोर्ट देने को कहा कि उसने आतंकी फंडिंग रोकने के लिए क्या उपाय किए हैं। एफएटीएफ मापदंड के अनुरूप आतंकी फंडिंग रोकने में विफल रहने की स्थिति में पाकिस्तान को कई तरह से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

दरअसल, पाकिस्तान लंबे समय से दुनिया को दिखाने की कोशिश करता रहा है कि वह खुद आतंकवाद से पीडि़त है और उसे खत्म करने के सारे प्रयास कर रहा है। भारत ने पिछले साल अक्टूबर में भी पेरिस में हुई एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को हो रही भारी फंडिंग का मुद्दा उठाया था। भारत का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र संघ से अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों की सूची में डाले गए लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद- दावा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं और आतंकी हमलों के लिए फंड इकट्ठा कर रहे हैं।

इसके लिए भारत ने कई दस्तावेज भी प्रस्तुत किए थे। भारत के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए एफएटीएफ ने इसकी जांच का फैसला किया और एशिया पैसिफिक ग्रुप को इस पर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट देने को कहा। लेकिन, एशिया पैसिफिक ग्रुप के सदस्यों को पाकिस्तान प्रभावित करने में सफल रहा और रिपोर्ट तैयार नहीं होने दी।

इसके बाद भारत ने फरवरी में एफएटीएफ की बैठक में फिर यह मुद्दा उठाया तो पाकिस्तान की ओर से इसका तीखा विरोध हुआ। पाकिस्तान की कोशिश थी कि इस मुद्दे को तकनीकी पहलुओं में उलझा दिया जाए। लेकिन, अमेरिका और यूरोपीय देशों के भारत के प्रस्ताव पर मिले समर्थन से पाकिस्तान की मंशा सफल नहीं हो सकी। एफएटीएफ बैठक की अध्यक्षता कर रहे स्पेन के वेगा सेरानो ने पाकिस्तान को आतंकी फंडिंग पूरी तरह रोकने के लिए तीन महीने का नोटिस थमा दिया।

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Posted By: Ravindra Pratap Sing

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