नई दिल्ली, आइएएनएस। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने ढाका और काठमांडु में तैनात दो प्रमुख पाकिस्तानी सैन्य अफसरों के खिलाफ पर्याप्त सुबूत इकट्ठा कर लिए हैं। इनमें से एक अफसर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान का करीबी है, जो नेपाल में पाक राजदूत के पद पर तैनात है। वहीं, दूसरा ढाका में पाकिस्तानी दूतावास में डिफेंस अटैची है। असलियत में वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ का ही नुमाइंदा है। यह दोनों पाकिस्तानी अफसर कूटनीतिक चैनलों का दुरुपयोग करके फर्जी भारतीय करंसी नोटों (एफआइसीएन) की तस्करी करने का जरिए बने हुए हैं। इसके साथ ही पाकिस्तानी सेना के यह दो बड़े अफसर जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भारत विरोधी गतिविधियों को भी बढ़ावा देने में लगे हुए हैं।

सभी तरह की गतिविधियों पर नजर 

भारतीय खुफिया एजेंसी आइबी की रिपोर्ट के आधार पर भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को अलर्ट कर दिया गया है। साथ ही भारत-बांग्लादेशसीमा पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को तैनात किया गया है। इसके अलावा, जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी पूरी सीमा पर तैनात किया गया है। यह एजेंसियां लगातार सभी तरह की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

जम्मू-कश्मीर पर दुष्प्रचार करके भड़काया

खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में पाकिस्तानी राजदूत मजहर जावेद ने काठमांडु के महाराजगंज स्थित पाकिस्तानी दूतावास के परिसर में विगत 27 सितंबर को एक उच्च स्तरीय बैठक की थी। इस बैठक में काठमांडु के प्रभावशाली लोगों को जम्मू-कश्मीर पर दुष्प्रचार करके भड़काया गया था। बैठक में तीस वरिष्ठतम मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और राजनयिकों को भी आमंत्रित किया गया था।

कश्मीर के हालात को लेकर झूठी तस्वीर पेश की

रिपोर्ट में कहा गया है कि मजहर ने नेपाली लॉबी को यह कह कर भड़काया है कि भारत सरकार घाटी में लोगों को प्रताडि़त करके मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रही है। उसके बाद तीन अक्टूबर को मजहर ने नेपाली अखबार 'नागरिक' में लेख लिखा। इसमें उसने जम्मू और कश्मीर के हालात को लेकर झूठी तस्वीर पेश की। भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार मजहर जावेद ने दूतावास को ही आइएसआइ का अड्डा बना दिया है। वह यहां खुलेआम आइएसआइ के गुर्गो को शरण देता है।

नेपाल में पाक राजदूत जम्मू-कश्मीर पर दुष्प्रचार में जुटा

खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक ढाका में पाकिस्तानी दूतावास का डिफेंस अटैची कर्नल शफकत नवाज वास्तव में आइएसआइ का प्रतिनिधित्व करता हैं। इतना ही नहीं, वह स्थानीय गैंगस्टरों से संपर्क स्थापित करके नकली भारतीय नोटों की संगठित तस्करी में अहम कड़ी है। उसका संबंध डी-कंपनी (दाऊद इब्राहिम) के गैंग से भी है। शफकत नवाज जम्मू और कश्मीर और देश के अन्य भागों में सक्रिय आइएसआइ के विभिन्न माड्यूलों को फंडिंग करने में अहम भूमिका निभाता है। उसकी भूमिका तब उजागर हुई जब विगत मई, 2019 में काठमांडु के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 7.67 करोड़ के नकली भारतीय नोट बरामद हुए। इसी सिलसिले में नेपाली पुलिस ने तब नेपाल में डी कंपनी के ऑपरेटर युसुफ अंसारी को गिरफ्तार किया था।

वह बराबर काठमांडु स्थित पाकिस्तानी दूतावास जाता रहता था। उसके कुछ महीने बाद अगस्त में अंसारी के गुर्गो को भी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नकली नोटों की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। इन गुर्गो पर कराची के सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में नकली भारतीय नोटों की छपाई किए गए नोटों की तस्करी करने का आरोप लगा। भारतीय एजेंसियों ने ढाका में पाकिस्तानी उच्चायोग की भूमिका पर भी काफी सुबूत जुटा लिए हैं।

नकली भारतीय नोटों की तस्करी में भी बड़ी भूमिका

एक विश्वसनीय सूत्र के अनुसार पाकिस्तानी उच्चायोग के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर कामरान नाजिर रिजवी ने ढाका के पॉश इलाके गुलशन एरिया में स्थित एक होटल में जेहादी नेताओं के साथ कई बैठकें की हैं। आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के अलावा कामरान नाजिर मलिक ने नकली भारतीय नोटों की तस्करी में भी बड़ी भूमिका निभाई है।

विगत 25 सितंबर को 50 लाख रुपये की कीमत के नकली भारतीय नोटों का एक पार्सल ढाका पुलिस ने जब्त किया था। जांच के दौरान पाया गया कि दुबई में स्थित आइएसआइ एजेंट सलमान शेरा ऐसे पार्सलों को पानी के जहाजों के जरिए पूरे बांग्लादेश में पहुंचा रहा था। इससे पहले, वर्ष 2015 में ढाका पुलिस की रिपोर्ट पर उच्चायोग के अटैची मजहर खान को बांग्लादेश ने देश निकाला दे दिया था। उस पर नकली भारतीय नोटों की तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क चलाने का आरोप था।

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Posted By: Arun Kumar Singh

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