महंगी फीस बनी रुकावट, तमिलनाडु-पुडुचेरी में नहीं भर पाईं 800 से ज्यादा MBBS सीटें
तमिलनाडु और पुडुचेरी के डीम्ड विश्वविद्यालयों में 800 से अधिक एमबीबीएस सीटें महंगी फीस के कारण खाली रह गईं।

तमिलनाडु-पुडुचेरी में 800 से अधिक एमबीबीएस सीटें खाली रहीं

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नीट यूजी 2026 के लिए अंतिम काउंसलिंग के बाद तमिलनाडु और पुडुचेरी के डीम्ड विश्वविद्यालयों में 800 से अधिक मेडिकल सीटें महंगी फीस के कारण खाली रह गईं।
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी के सूत्रों के अनुसार, पूरे देश में एमबीबीएस की कुल 837 सीटें (आल इंडिया कोटा सीटों सहित) खाली रह गईं, जिनमें से 824 सीटें अकेले तमिलनाडु और पुडुचेरी के डीम्ड विश्वविद्यालयों में खाली थीं।
शिक्षाविदों ने डीम्ड विश्वविद्यालयों में फीस की कोई सीमा न होने की आलोचना की। उन्होंने बताया कि नीट में अच्छे अंक लाने वाले छात्र इन सीटों को लेने से इसलिए पीछे हट जाते हैं, क्योंकि वे इतनी भारी-भरकम फीस नहीं भर सकते। इस तरह, मेरिट के आधार पर राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा कराने का मुख्य उद्देश्य ही विफल हो जाता है।
वरिष्ठ शिक्षाविद और स्टेट प्लेटफार्म फार कामन स्कूल सिस्टम-तमिलनाडु के महासचिव पी.बी. प्रिंस गजेंद्र बाबू ने बताया कि नीट में अच्छे अंक लाने वाले वे छात्र, जिनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे इतनी महंगी फीस वाले निजी संस्थानों में दाखिला ले सकें, वे खुद ही पीछे हट जाते हैं।
ऐसे छात्र काउंसलिंग के लिए आवेदन ही नहीं करते। उन्होंने कहा, "कम अंक लाने वाले वे छात्र, जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, आवेदन करते हैं और सीट हासिल कर लेते हैं। नीट अपने दोनों उद्देश्यों में विफल रहा है, न तो इसने मेरिट को सुनिश्चित किया और न ही मेडिकल शिक्षा के व्यावसायीकरण पर रोक लगाई।'
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
