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न्याय के लिए दशकों तक इंतजार कर रही जनता, देशभर के High Courts में 65 लाख से ज्यादा मामले लंबित

Published: Thu, 17 Sep 2026 08:57 AM (IST)

भारतीय उच्च न्यायालयों में 65 लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे आम लोगों को न्याय मिलने में दशकों लग रहे हैं।

देशभर के हाईकोर्ट में लंबित मामले।

देशभर के हाईकोर्ट में लंबित मामले।

HighLights

  1. भारतीय उच्च न्यायालयों में 65 लाख से अधिक मामले लंबित हैं।

  2. न्याय मिलने में दशकों का समय लग रहा है, चिंताजनक स्थिति।

  3. एक मामला 22 साल से लंबित, सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट गए।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय न्यायपालिका में मुकदमों के लंबे इंतजार और भारी-भरकम लंबित मामलों को लेकर एक बार फिर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जहां बताया गया है कि देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में 65 लाख से अधिक मामले पेंडिंग पड़े हैं, जिसके कारण आम लोगों को न्याय मिलने में दशकों का समय लग रहा है।

उदाहरण के तौर पर ऐसे समझिए कि राजस्थान के जालोर जिले के एक स्वास्थ्यकर्मी को 1999 में दैनिक वेतन भोगी के रूप में काम से हटा दिया गया था। इसके खिलाफ उन्होंने जोधपुर लेबर कोर्ट के फैसले से नाखुश होकर साल 2004 में राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

22 साल बाद भी नहीं पूरी हुई सुनवाई

इस पूरे मामले में चौंकाने और हैरान करने वाली बात यह है कि आज इस घटना के 22 साल बीत जाने के बाद भी उनकी इस याचिका पर सुनवाई तक पूरी नहीं हो पाई है। मजबूरन उन्हें अपनी याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख रहा?

मामले में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए वही पुराना और व्यावहारिक आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि हम याचिका पर विचार करने का कोई आधार नहीं देखते हैं, लेकिन याचिकाकर्ता को यह छूट देते हैं कि वह हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई के लिए आवेदन दे सकता है।

हाईकोर्ट्स में लंबित मामलों की स्थिति समझिए

बता दें कि देश के बड़े उच्च न्यायालयों में मामलों का अंबार लग चुका है। शीर्ष अदालतों के आंकड़ों के अनुसार स्थिति कुछ इस प्रकार है:-

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट- करीब 12.5 लाख मामले लंबित (यहां प्रत्येक जज/बेंच रोज औसतन 150 से 200 मामलों की सुनवाई करती है, फिर भी भारी बैकलॉग के आगे यह नाकाफी साबित हो रहा है)।
  • राजस्थान हाईकोर्ट- करीब 7 लाख मामले लंबित।
  • बॉम्बे हाईकोर्ट- करीब 6.4 लाख मामले लंबित।
  • मद्रास हाईकोर्ट- करीब 5.6 लाख मामले लंबित।
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट- करीब 4.9 लाख मामले लंबित।
  • कर्नाटक हाईकोर्ट- करीब 3.3 लाख मामले लंबित।
  • आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट- करीब 2.5 लाख मामले लंबित।
  • कलकत्ता हाईकोर्ट- करीब 1.9 लाख मामले लंबित।
  • दिल्ली हाईकोर्ट- करीब 1.2 लाख मामले लंबित।

समस्या की जड़ समझिए

गौरतलब है कि देश भर के विभिन्न उच्च न्यायालयों में लगभग 15 लाख मामले ऐसे हैं जो 10 साल से भी ज्यादा समय से लंबित पड़े हैं। इन अदालतों में मुकदमों का बोझ इतना ज्यादा हो गया है कि न्यायिक निर्णय लेने की क्षमता पर इसका भारी असर पड़ रहा है।

स्थिति यह है कि लोग अपने मामलों के जल्दी फैसले के लिए नहीं, बल्कि महज सुनवाई की तारीख जल्दी पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रहे हैं, जिससे सुप्रीम कोर्ट पर भी मुकदमों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।