गुवाहाटी, एजेंस। असम में वर्ष 2011 से इस वर्ष चार सितंबर तक उल्फा और अन्य उग्रवादी समूहों के 5,000 से अधिक उग्रवादियों को पकड़ा गया, लेकिन केवल एक को दोषी ठहराया जा सका है। इस उग्रवादी को 2012 में लखीमपुर जिले में दोषी ठहराया गया था। उसके बाद से किसी अन्य उग्रवादी को दोषी नहीं ठहराया गया है। कुल 2,606 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। ज्यादातर मामलों में सुनवाई चल रही है।

असम पुलिस ने चरमपंथी समूहों के 5,202 कैडरों को किया गिरफ्तार

आधिकारिक दस्तावेज में कहा गया है कि असम पुलिस ने 2011 से इस साल चार सितंबर तक उल्फा और अन्य चरमपंथी समूहों के 5,202 कैडरों को गिरफ्तार किया, जिनमें बोडो, गारो, राभा, कार्बी, आदिवासी और मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल थे। गिरफ्तार उग्रवादियों में सबसे ज्यादा 2,392 बोडो उग्रवादी समूहों से थे। उल्फा के 1,468 और कार्बी समूहों से 582 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आदिवासी समूहों से 346 गारो समुदाय से 178, मुस्लिम से 155 और राभा समुदायों से 81 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है।

उग्रवादियों को मिलता है राजनीतिक संरक्षण

गौहाटी उच्च न्यायालय के अधिवक्ता शांतनु बोरठाकुर ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि एक आरोपी की सजा में देरी कई चरणों में होती है और यह कई बार जानबूझकर किया जाता है। उन्होंने कहा कि जब तक हम गिरफ्तारी की तारीख और चार्जशीट दाखिल करने की तारीख नहीं जानते तब तक यह जानना मुश्किल है कि वास्तव में देरी कहां हो रही है। कई बार जांचकर्ता जानबूझकर जांच में देरी करते हैं क्योंकि कई उग्रवादियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता है।

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Edited By: Sonu Gupta

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