नई दिल्ली, विनीत शरण। सस्टेनेबल एग्रीकल्चर यानी सतत कृषि को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। पारंपरिक खेती की तुलना में सस्टेनेबल एग्रीकल्चर भूमि क्षरण, भूजल में गिरावट और जैव विविधता में कमी जैसी चुनौतियों से निपटने में ज्यादा सक्षम है। इससे भारत पोषण सुरक्षा भी प्रदान कर पाएगा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से भी लड़ पाएगा। काउंसिल ऑफ एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर की हालिया रिपोर्ट सस्टेनेबल एग्रीकल्चर इन इंडिया 2021 में यह बात कही गई है। इस रिपोर्ट में भारत में सस्टेनेबल एग्रीकल्चर की स्थिति बताने के साथ ही इसे बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी दिए गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सस्टेनेबल एग्रीकल्चर भारत की कृषि में बेहद कम है। यहां ज्यादातर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के 5 उद्यम (क्रॉप रोटेशन, एग्रोफारेस्टिंग, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, मल्चिंग एंड प्रसिजन फार्मिंग) को अपनाया गया है। वह भी को कुल कृषि भूमि के सिर्फ पांच फीसद हिस्से पर। सस्टेनेबल एग्रीकल्चर की आधुनिक प्रैक्टिस का प्रयोग देश के सिर्फ 50 लाख किसान करते हैं यानी सिर्फ 4 फीसद।

भारत में सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाले प्रकार

क्रॉप रोटेशन-3 करोड़ हेक्टेयर और 1.5 करोड़ किसान इसे अपनाते हैं

एग्रो फारेस्टिंग-ज्यादातर बड़े किसान इसका प्रयोग करते हैं, 2.5 करोड़ हेक्टेयर पर

रेन वाटर हार्वेस्टिंग-2 से 2.7 करोड़ हेक्टेयर पर

आर्गेनिक फार्मिंग-28 लाख हेक्टेयर यानी कुल 14 करोड़ हेक्टेयर का सिर्फ 2 फीसद

नेचुरल फार्मिंग-इसका विकास तेजी से हो रहा है, 8 लाख किसानों ने इसे अपनाया है

इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट-50 लाख हेक्टेयर में इसे अपनाया गया है, वह भी कई दशक के प्रयास के बाद

राज्यों की स्थिति

देश के कृषि मंत्रालय के बजट का सिर्फ .8 फीसद फंड अभी सतत कृषि के लिए है। वहीं, सतत कृषि के सबसे ज्यादा प्रयोग में आने वाले 16 उद्यम में से 8 को ही विभिन्न स्कीमों में जगह मिली है। वहीं, सरकार आर्गेनिक फार्मिंग पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है। राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश में सिविल सोसायटी संगठन सबसे ज्यादा सक्रिय हैं, जो आर्गेनिक फार्मिंग, नेचुरल फार्मिंग और वर्मी कंपोस्टिंग के लिए काम कर रहे हैं।

सुझाव

शोधकर्ताओं का कहना है कि सतत कृषि का विस्तार वर्षा वाले क्षेत्रों से शुरू हो सकता है, क्योंकि वे पहले से ही कम-संसाधन कृषि का अभ्यास कर रहे हैं, कम उत्पादकता वाले हैं। वहीं उन किसानों को प्रोत्साहित किया जाए और उन्हें इंसेंटिव दिया जाए जो उत्पादन के साथ संरक्षण भी करते हैं। इसके अलावा कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में हितधारकों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाने के लिए कदम उठाएं और उन्हें वैकल्पिक दृष्टिकोणों के लिए अधिक खुलापन दिया जाए। सतत कृषि संबंधी डाटा को बेहतर बनाया जाए।

सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के सबसे कारगर 16 उद्यम

जैविक खेती (ऑर्गेनिक फार्मिंग), कृषि वानिकी (एग्रोफारेस्टिंग), समन्वित कीट प्रबंधन, कृमि खाद, बायोडायनामिक खेती, नेचुरल फार्मिंग, सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसीफिकेशन, समोच्च खेती या समोच्च जुताई, प्रिसिजन फार्मिंग, इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम, संरक्षण कृषि, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, फसल चक्र और अंतर - फसल, फ्लोटिंग फार्मिंग, कवर क्रॉप एंड मल्चिंग, परमाक्लचर 

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