यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 06, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
विपक्षी दल मोदी कैम्प में शामिल होना बंद करें : चिदंबरम
चिदंबरम ने एक इंटरव्यू में बुधवार को कहा कि अभी लोग चुनाव के लिये एकजुट नहीं हुए हैं। दो तरह की चीजें हो रही हैं।

नई दिल्ली, आइएएनएस। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने अंतत: चुनावी गणित की दुश्वारियों को स्वीकार करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी का लोहा माना है। उन्होंने कहा कि जब तक विपक्षी दल टूट-टूटकर मोदी-कैम्प में जाना बंद नहीं करेंगे तब तक 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर लड़ पाना मुश्किल होगा। वह यह भी मानते हैं कि अगले चुनाव के लिये यह भी तय नहीं है कि कौन-कौन पंक्तिबद्ध होगा। लेकिन कांग्रेस और अन्य दलों का साथ लेकर मंच को व्यापक बनाना चाहिये ताकि भारतीय जनता पार्टी को पछाड़ा जा सके।
चिदंबरम ने एक इंटरव्यू में बुधवार को कहा कि अभी लोग चुनाव के लिये एकजुट नहीं हुए हैं। दो तरह की चीजें हो रही हैं। कुछ विपक्षी दल जैसे जद-यू और अन्नाद्रमुक टूटकर मोदी कैम्प में जा रहे हैं। दूसरी ओर, अन्य विपक्षी दलों के बड़े नेता व अहम धड़े टूटकर भाजपा के कैम्प में जा रहे हैं। जब तक कि विपक्षी दल इस टूट को नहीं रोकते हैं, भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना मुश्किल हो जाएगा।
पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने कहा कि गुजरात में कांग्रेस ने अपने 15 विधायकों को खो दिये। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने भी त्रिपुरा में अपने छह विधायक गंवा दिये। यह गंभीर नुकसान है। यह एक समस्या है और कांग्रेस पार्टी को इस समस्या से निपटना होगा। सबसे पहले हमें अपने नेताओं और धड़ों को भाजपा में शामिल होने से रोकना होगा। दूसरे, हमें आपसी सहयोग से अन्य विपक्षी दलों से जुड़ना होगा ताकि भाजपा के खिलाफ बड़ा मंच बने। चूंकि कांग्रेस ही अकेली राष्ट्रीय कद की पार्टी है इसलिये कांग्रेस का फर्ज है कि वह यह विपक्षी मंच बनाये।
जब उनसे पूछा गया कि वह भाजपा विरोधी मंच में ओडिशा के बीजू जनता दल जैसी पार्टियों को कैसे शामिल करेंगे, चिदंबरम ने कहा कि मैं ऐसे मामलों और नेताओं से डील नहीं करता। मैं बस इतना कह सकता हूं कि देश हित में इन सभी दलों को एक मंच पर आना चाहिये। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक विचार वाले दलों को एक मंच पर आना चाहिये।
नोटबंदी पर चिदंबरम ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वो (मोदी) जीत रहे हैं। वह पहले लड़ाई जीत चुके हैं लेकिन नोटबंदी पर आरबीआइ की रिपोर्ट और जीडीपी के आंकड़ों के बाद लोगों की धारणा बदली है।
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