फॉर्म 6 विवाद: SC की टिप्पणी के बाद CEC पर विपक्ष हमलावर, कांग्रेस ने कहा- ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद विपक्ष ने फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला तेज कर दिया है।

SC की टिप्पणी के बाद CEC पर विपक्ष हमलावर।
HighLights
विपक्ष ने फॉर्म-6 बदलाव पर ज्ञानेश कुमार पर हमला तेज किया।
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार पर गैर-कानूनी बदलाव का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की, समझौता नहीं।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्षी दलों के आंदोलन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस ने फार्म-6 में किसी तरह के संशोधन को मंजूरी नहीं देने की सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए अपने हमलों को और तीखा कर दिया है।
चुनाव आयोग मुख्यालय तक विपक्षी सांसदों के मंगलवार को होने वाले मार्च से ठीक पहले सर्वोच्च अदालत की इस टिप्पणी का सहारा लेते हुए लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि अब यह बात बिना किसी शक के साबित हो चुकी है कि ज्ञानेश कुमार ने गैर-कानूनी और एकतरफा तरीके से 'फार्म-6' में बदलाव किया।
यह इस बात का एक और सुबूत है कि उन्होंने भाजपा की मदद करने के लिए अपने पद का गलत इस्तेमाल किया।
राहुल गांधी ने सोमवार को एक्स पोस्ट में एसआईआर विवाद पर चुनाव आयोग की 26 सितंबर को जारी प्रेस बयान साझा किया। आयोग ने इस बयान में कहा था कि एसआईआर के लिए फार्म-6 के साथ संलग्न घोषणापत्र को सुप्रीम कोर्ट ने कायम रखा है। गैर-एसआईआर अवधि के लिए नियमों (मतदाता पंजीकरण नियम 1960) के अनुसार लागू फार्म का उपयोग किया जाएगा।
खरगे ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्ष के तेवर और तीखे होने का संदेश देते हुए एक्स पोस्ट में कहा कि पार्टी तीन मांगों-ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एसआईआर रद करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर कोई समझौता नहीं करेगी। देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता और आइएनडीआइए के साथी इन तीन मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं।
जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि ज्ञानेश कुमार ने साफ "झूठ" बोला और जानबूझकर फार्म-6 में बदलाव किया ताकि 'जेन-जी' वोटरों के नाम हटाए जा सकें, जिनसे प्रधानमंत्री बुरी तरह डरे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में चुनाव आयोग और सीईसी पर भरोसा किया है कि वे निष्पक्ष और सही जानकारी देंगे।
यह भरोसा दशकों के अनुशासित, मर्यादित और सक्षम कामकाज पर आधारित था। लेकिन भरोसे के विरासत से बनी साख का दावा ज्ञानेश कुमार नहीं कर सकते और फार्म-6 के संबंध में उनका छलपूर्ण आचरण एक गंभीर उदाहरण है, जिसका किसी तरह बचाव नहीं किया जा सकता।
