न्यूयॉर्क। हाल ही में हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि इंटरनेट पर नि:शुल्क पॉर्न सामग्री उपलब्ध कराने वाली वेबसाइटों की बढ़ती संख्या की जहां पुरुषों में स्वीकार्यता बढ़ी है, वहीं महिलाओं में इसे लेकर नकारात्मक रुख देखा गया। यह अध्ययन शोध पत्रिका 'सोशल करेंट्स' के ताजा अंक में प्रकाशित हुई है।

मैरीलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, समय के साथ पीढ़ियों के बीच पॉर्नोग्राफी के प्रति बर्ताव में अंतर बढ़ा है। शोध छात्रा लूसिया सी. लाइके के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में सामने आया कि बीते 40 साल में पॉर्नोग्राफी को लेकर महिलाओं व पुरुषों दोनों के विरोध में तेजी से गिरावट आई है, जिससे पॉर्नोग्राफी के प्रति रुख में सांस्कृतिक अंतर पैदा हुआ है।

विश्वविद्यालय की ओर से जारी वक्तव्य में लाइके बताती हैं, 'महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा पॉर्नोग्राफी के ज्यादा खिलाफ हैं और पुरुषों में भी इसके विरोध की प्रकृति में तेजी से गिरावट आई है। इसलिए, पॉर्नोग्राफी के विरोध को लेकर लैंगिक असमानता जैसी स्थिति बन गई है।'

शोधकर्ताओं ने 1975 से 2012 के बीच पॉर्नोग्राफी के विरोध को लेकर पीढ़ियों के बीच मतैक्य का अध्ययन किया। अध्ययन में प्रतिभागियों से पॉर्नोग्राफी पर लीगल सेंसरशिप के समर्थन को लेकर राय मांगी गई। उन्होंने 'जनरल सोशल सर्वे' के आंकड़ों का अपने विश्लेषण में इस्तेमाल किया।

पिछले अध्ययनों में भी सामने आ चुका है कि पॉर्नोग्राफी के नकारात्मक प्रभाव को लेकर महिलाएं ज्यादा चिंतातुर रहती हैं। अध्ययन के सह लेखक समाजशास्त्र के प्राध्यापक फिलिप एन. कोहेन के अनुसार, 'टरनेट पर पॉर्न सामग्री की उपलब्धता जैसे-जैसे सहज होती जा रही है और जैसे-जैसे उसकी गुणवत्ता में गिरावट और महिलाओं के प्रति ज्यादा क्रूर होता जा रहा है, महिलाओं में इसे लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।'

Posted By: Manoj Yadav

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