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'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर संसदीय समिति से नहीं मिलेंगे सुप्रीम कोर्ट के जज, बैठक रद

Published: Fri, 02 Oct 2026 08:09 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने 'एक देश, एक चुनाव' से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर संसदीय समिति के साथ चर्चा करने से इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट।

सुप्रीम कोर्ट।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने संसदीय समिति की बैठक में शामिल होने से मना किया।

  2. 'एक देश, एक चुनाव' बिल पर चर्चा से जजों ने दूरी बनाई।

  3. न्यायिक समीक्षा की संभावना के कारण चर्चा को अनुचित बताया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में 'एक देश, एक चुनाव' को लेकर सियासत सातवें आसमान पर है। वहीं दूसरी ओर कानूनी गलियारों में भी इस मामले को लेकर हलचल तेज हो गई है।

इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि उसके वरिष्ठ न्यायाधीश एक साथ चुनाव कराने से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर किसी भी संसदीय समिति के साथ चर्चा नहीं करेंगे।

समिति ने दिया था आमंत्रण

बता दें कि संसद की एक संयुक्त समिति ‘संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024’ और ‘केंद्र शासित प्रदेश विधि (संशोधन) विधेयक, 2024’ की जांच कर रही है। इस समिति ने 6 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और अन्य वरिष्ठ जजों को इस विषय पर अनौपचारिक चर्चा के लिए आमंत्रित किया था।

बैठक में शामिल नहीं होंगे जज

हालांकि अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के महासचिव ने समिति को पत्र लिखकर यह स्पष्ट कर दिया कि वरिष्ठ जजों की आपसी चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है कि वे इस बैठक में शामिल नहीं होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या तर्क दिया?

सुप्रीम कोर्ट के पत्र के अनुसार, चूंकि यह प्रस्तावित संविधान संशोधन भविष्य में अदालत में न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकता है, इसलिए प्रशासनिक स्तर पर इस विषय पर चर्चा करना उचित या वांछनीय नहीं होगा। इस स्पष्टीकरण के बाद, भाजपा सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली इस संसदीय समिति ने अपने सभी सदस्यों को बैठक रद होने की सूचना दे दी।

विपक्ष का कड़ा विरोध 

मामले में विपक्षी सांसद कपिल सिब्बल ने इस प्रस्तावित बैठक पर कड़ा ऐतराज जताया था और इसे शक्ति के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन बताया था। विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल असंवैधानिक है और राज्यों के संघीय अधिकारों पर हमला है।

अब समझिए सरकार का पक्ष

वहीं, दूसरी ओर भाजपा और उसके सहयोगी दलों का तर्क है कि लगातार होने वाले चुनावों से देश के विकास कार्यों में रुकावट आती है। उनका मानना है कि एक साथ चुनाव होने से देश के आर्थिक विकास को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। गौरतलब है कि यह बिल दिसंबर 2024 में लोकसभा में पेश किया गया था, जिसे बाद में विस्तृत जांच के लिए संसदीय समिति के पास भेज दिया गया था।