नईदुनिया, भोपाल। लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने को लेकर जनमानस की नब्ज टटोलने के लिए मध्य प्रदेश में गठित कमेटी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें एक साथ चुनाव कराने का पक्ष लिया गया है।
यही नहीं, प्रदेश में निकाय चुनाव एक साथ कराने की पहल करने की सिफारिश भी की गई है। मप्र का राज्य निर्वाचन आयोग भी इसका पक्षधर है और सरकार को प्रस्ताव भी दे चुका है। संभावना जताई जा रही है कि अगले साल होने वाले निकाय चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक मप्र के जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की अध्यक्षता में गठित हुई समिति ने राजनीतिक दल, गणमान्य नागरिकों सहित मौजूदा कानूनों का अध्ययन करने के बाद रिपोर्ट तैयार की है। कांग्रेस भी चुनाव एक साथ कराने पर सहमत है। आम आदमी पार्टी ने कोई राय नहीं रखी तो बाकी दलों की मिली-जुली प्रतिक्रिया रही है।

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राज्य निर्वाचन आयोग ने भी समिति को अपने सुझाव दिए थे। आयोग पहले से निकाय चुनाव एक साथ कराने का पक्षधर रहा है। चुनाव आयुक्त आर. परशुराम इसको लेकर राज्य सरकार को प्रस्तुतीकरण भी दे चुके हैं। इसके लिए राज्य स्तर पर कुछ कानूनों में संशोधन करना होगा तो कुछ नियमों को बदलना होगा। 2019 में निकायों के आम चुनाव होंगे। समिति का मानना है कि केंद्र स्तर पर भले ही प्रक्रिया में समय लगे पर राज्य स्तर पर पहल की जा सकती है।

91 निकायों के चुनाव सामान्य से अलग 
सूत्रों के मुताबिक राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को एक साथ चुनाव कराने को लेकर 2016 में 11 पेज की रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया है कि 91 निकाय ऐसे हैं, जहां चुनाव विभिन्न कारणों से सामान्य चुनावों के साथ नहीं हो रहे हैं। कुछ मामलों में कोर्ट के निर्णय से भी समयचक्र बदला है। यही स्थिति पंचायतराज संस्थाओं की भी है। आयोग ने एक साथ चुनाव कराने के लिए कानूनों में संशोधन का मसौदा भी सरकार को भेजा है।

हमने मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंप दी है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने को लेकर कार्रवाई केंद्र स्तर से होगी। निकाय चुनाव को लेकर राज्य सरकार के स्तर पर कानूनों में बदलाव करने होंगे।

- डॉ. नरोत्तम मिश्रा, जनसंपर्क मंत्री, मप्र

 

Posted By: Arun Kumar Singh