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देशभर में थमे ओला-उबर और रैपिडो के पहिए, आज हड़ताल का एलान; क्या है मांगें?

Published: Sat, 07 Feb 2026 09:18 AM (IST)Updated: Sat, 07 Feb 2026 09:23 AM (IST)

देशभर में 7 फरवरी को ओला, उबर और रैपिडो ड्राइवरों ने हड़ताल की घोषणा की है। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म ...और पढ़ें

ओला, उबर, रैपिडो ड्राइवरों की हड़ताल

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज यानी 7 फरवरी, शनिवार को देशभर में ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े ड्राइवरों ने काम बंद करने का एलान किया है। उबर और रैपिडो से जुड़े ड्राइवर अपने मोबाइल एप बंद रखेंगे। जिसके कारण लोग ऑनलाइन कार, ऑटो या बाइक-टैक्सी नहीं बुक कर सकेंगे। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

दरअसल, तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने राष्ट्रीय मजदूर संगठनों के साथ मिलकर इस हड़ताल का एलान किया है। इस हड़ताल को 'ऑल इंडिया ब्रेकडाउन' नाम दिया गया है,

आज ओला-उबर-रेपिडो की हड़ताल

तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस हड़ताल की जानकारी साझा करते हुए लिखा, पूरे भारत में एप-आधारित परिवहन कर्मचारी 7 फरवरी 2026 को ऑल इंडिया ब्रेकडाउन करेंगे। कोई न्यूनतम किराया नहीं। कोई रेगुलेशन नहीं। अंतहीन शोषण।'

क्यों कर रहें हड़ताल?

तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन का कहना है कि न तो उनका कोई किराया तय है और न ही कोई नियम, बस उनका शोषण हो रहा है। इस यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को इसको लेकर एक चिट्ठी लिखी है।

कैब ड्राइवरों का कहना है कि सरकार की तरफ से कोई रेट निर्धारित नहीं है, इसलिए कंपनियां अपनी मर्जी से पैसे काटती हैं। पत्र में लिखा गया, 'कंपनियों के ही किराया तय करने की वजह से लाखों ट्रांसपोर्ट वर्कर्स में इनकम को लेकर इनसिक्योरिटी है, इससे शोषण और खराब वर्किंग कंडीशन पैदा होती हैं।'

यूनियन ने सरकार से कार्रवाई करने की अपील की है। यूनियन का दावा है कि लाखों एप-बेस्ड ड्राइवरों को गरीबी में धकेला जा रहा है, जबकि एग्रीगेटर कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं।

पैनिक बटन लगाने से बढ़ेगा बोझ

एक बयान में, महाराष्ट्र कामगार सभा ने कहा कि देश भर में ऐप-बेस्ड टैक्सियों और ऑटो रिक्शा के ड्राइवर 7 फरवरी को बाइक टैक्सी सेवाओं और ओला, उबर और रैपिडो जैसे राइड एग्रीगेटर्स की "मनमानी" किराया नीतियों के विरोध में राष्ट्रव्यापी एक दिन की हड़ताल करेंगे। उन्होंने दावा किया कि अनिवार्य पैनिक बटन लगाने से ड्राइवरों पर वित्तीय बोझ पड़ा है।

पैनिक डिवाइस लगाने के लिए किया जा रहा मजबूर

महाराष्ट्र कामगार सभा द्वारा जारी बयान के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा 140 पैनिक बटन डिवाइस प्रोवाइडर्स को मंजूरी दी गई है, राज्य सरकार ने इनमें से लगभग 70 प्रतिशत कंपनियों को अनधिकृत घोषित कर दिया है। नतीजतन, कैब ड्राइवरों को पहले से लगाए गए डिवाइस हटाने और नए डिवाइस लगाने के लिए अनावश्यक रूप से लगभग 12,000 रुपये खर्च करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उन्हें गंभीर वित्तीय कठिनाई हो रही है।

ड्राइवरों के संगठन ने ओपन परमिट पॉलिसी के तहत ऑटो रिक्शा की संख्या में वृद्धि के कारण आय के नुकसान पर भी चिंता जताई और यह भी आरोप लगाया कि अवैध बाइक टैक्सियों से जुड़े हादसों के पीड़ितों को बीमा लाभ से वंचित किया जा रहा है। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)