नई दिल्ली, (एजेंसी)। इस साल इंजीनियरिंग में लगभग 80,000 सीटें कम होंगी। इसी के साथ आने वाले चार सालों में करीब 3.1 लाख सीटें कम हो सकती हैं, जिसमें 2018-19 शैक्षणिक सत्र भी शामिल हैं।साल 2012-13 से इंजिनियरिंग में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या में करीब 1.86 लाख की कमी आई है। छात्रों की दिलचस्पी कम होने से कई कॉलेज बंद होने की कगार पर हैं।

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआइसीटीई) के अनुसार करीब 200 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद करने के लिए आवेदन कर चुके हैं, इसलिए इन कॉलेजों ने नए छात्रों को नामांकन नहीं किया है, वे मौजूदा बैचों के ग्रेजुएट होने तक खुले रहेंगे। हालांकि, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) या नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआइटी) जैसे संस्थानों के लिए इनटेक में वृद्धि हुई है। अब, एआईसीटीई ने यह भी निर्णय लिया है कि 2022 तक, तकनीकी संस्थानों के कम से कम 50 प्रतिशत कार्यक्रमों को राष्ट्रीय पहचान बोर्ड (एनबीए) से मान्यता प्राप्त करनी होगी। वर्तमान में, लगभग 10 प्रतिशत कार्यक्रम भारत में मान्यता प्राप्त हैं।

2016 से हर साल इंजीनियरिंग सीटों में लगभग 75,000 की गिरावट देखी जा रही है। 2016-17 में, स्नातक स्तर पर कुल प्रवेश क्षमता 15,71,220 थी, जिसमें से कुल नामांकन 7,87,127 था, जो कि लगभग 50.1 प्रतिशत है। 2015-16 में कुल खपत 16,47,155 था, जिसमें से नामांकन 8,60,357 था, जो 52.2 प्रतिशत था।

एआईसीटीई के अध्यक्ष, अनिल सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि इस साल भी 80,000 सीटें कम हो सकती हैं। करीब 200 कॉलेजों ने बंद करने के लिए आवेदन किया है क्योंकि हालिया दिनों में उनके पास बहुत कम एडमिशन के लिए अप्लाई किया था। इंजीनियरिंग कॉलेजों को बंद करने के बावजूद मौजूदा बैच प्रभावित नहीं होंगे क्योंकि कॉलेज पहले से नामांकित छात्रों को उनका पाठ्यक्रम पूरा करने तक काम करना जारी रखेंगे। हालांकि ये कॉलेज ने इस साल नए छात्रों का नामांकन नहीं करेंगे।

2016-17 एआईसीटीई डेटा के आधार पर, भारत में कुल 3,415 संस्थान हैं जो ग्रेजुएशन लेवल पर वास्तुकला और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम ऑफर करते हैं। इस अवधि के दौरान लगभग 50 संस्थान बंद हो चुके हैं। कई संस्थाएं जो खुली रहेगी, वो पाठ्यक्रमों की संख्या में कटौती कर सकती हैं।

Posted By: Arti Yadav

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