नई दिल्ली, एजेंसियां: बीते दिनों देश में ओमिक्रोन सबवैरिएंट BA.4 का पहला मामला पाया गया था। कोरोना के इसी वैरिएंट के कारण कई देशों में संक्रमण की नई लहर आई है। जिसके बाद अब देश में चौथी लहर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि देश में टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह के चेयरमैन डा. एनके अरोड़ा ने चौथी लहर को लेकर इनकार किया है। वहीं उन्होंने मंकीपाक्स को कोविड जितना संक्रामक या गंभीर नहीं बताया है।

मंकीपाक्स के 19 देशों में अब तक 237 मामले सामने आए

बता दें कि मंकीपाक्स संक्रमण के कुछ और देशों में मामले सामने आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बढ़ते संक्रमण से निपटने के लिए सरकारों से सीमित टीकाकरण शुरू करने को कहा है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक अब तक 237 संदिग्ध संक्रमित सामने आए हैं। मई की शुरुआत से अब तक 19 देशों में मंकीपाक्स के मामलों की पुष्टि हुई है। यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। राहत वाली बात ये है कि अब तक अधिकांश संक्रमण गंभीर नहीं हुए हैं।इंग्लैंड में मंगलवार को 14 नए केस मिले। इसी के साथ यहां संक्रमितों का आंकड़ा 70 पर पहुंच गया है। यूएई में मंकीपाक्स का पहला केस मिला है। उधर जर्मनी ने मंकीपाक्स को फैलने से रोकने के लिए एहतियात के तौर पर 40 हजार वैक्सीन डोज बनाने का आर्डर दिया है।

कुछ एंटीवायरल दवाएं मंकीपाक्स के लिए कारगर

ब्रिटेन में वर्ष 2018 और 2021 के बीच दुर्लभ संक्रामक रोग मंकीपाक्स से ठीक हुए सात मरीजों पर किए गए एक अध्ययन से यह पता चला है कि कुछ एंटीवायरल दवाओं में मंकीपाक्स के लक्षणों और रोगी के संक्रमण की अवधि को कम करने की क्षमता हो सकती है। ‘द लान्सेट इन्फैक्शियस डिजीज’ पत्रिका में मंगलवार को प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, विश्लेषण किए गए मामले अफ्रीका के बाहर के हैं। शोध से बीमारी के इलाज के लिए दो अलग-अलग एंटीवायरल दवाओं - ब्रिनसीडोफोविर और टेकोविरिमैट - के पहले प्रायोगिक उपयोग पर रोगी की प्रतिक्रिया की भी सूचना मिली। अध्ययन में ब्रिनसीडोफोविर से नैदानिक ​​लाभ के प्रमाण तो बहुत कम मिले, लेकिन यह भी निष्कर्ष निकला कि टेकोविरिमैट की संभावना को लेकर और शोध की आवश्यकता होगी। शोधकर्ताओं ने रक्त और मुंह की लार में मंकीपॉक्स वायरस का पता लगाने की भी रिपोर्ट दी है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस बीमारी के लिए बेहतर संक्रमण नियंत्रण और उपचार रणनीतियां अब तक स्थापित नहीं हुई हैं, अत: अध्ययन के आंकड़े बीमारी की नैदानिक ​​​​विशेषताओं के साथ-साथ संक्रमण की प्रवृत्ति को और समझने के वैश्विक प्रयासों में मदद कर सकते हैं।

भारत में ओमिक्रोन के सब वैरिएंट के प्रसार को लेकर जानिए क्या बोले विशेषज्ञ

पिछले दिनों भारत में ओमिक्रोन के सब-वेरिएंट BA.4 और BA.5 के मामले पाए गए हैं। इसके बाद से केंद्र सरकार कोरोना के इन सब वैरिएंट को लेकर अलर्ट हो गई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय टास्क फोर्स के सह-अध्यक्ष डाक्टर राजीव जयदेवन ने मंगलवार को कहा कि इन नए सब वैरिएंट से कोरोना के संक्रमण में वृद्धि नहीं होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि लोगों को इन सब वैरिएंट से बचने के लिए सावधान रहने की आवश्यकता है। समाचार एजेंसी एएनआइ को डाक्टर जयदेवन ने बताया कि ओमक्रोन सब वैरिएंट के मामले कई देशों में बहुत तेजी से बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के अनुभव से पता चलता है कि अगर हम पर्याप्त सावधानी बरतें तो ये दोनों सब वैरिएंट बड़े पैमाने पर कोई समस्या नहीं पैदा करने जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि BA.4 और BA.5 नए वायरस नहीं हैं, बल्कि ये कोरोना संक्रमण के ओमिक्रोन के सब वैरिएंट हैं।

Edited By: Amit Singh