युवराज गुप्ता. बुरहानपुर। मध्यप्रदेश में सर्वाधिक पावरलूम कारखानें बुरहानपुर में हैं। करीब 50 हजार पावरलूम पर कपड़ा बनता है। देश के बड़े बाजार के अलावा निर्यात भी किया जाता है। इस ऐतिहासिक शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ यहां के पावरलूम ही हैं। इनमें हाथ से संचालित देसी पावरलूम भी चलते हैं, तो बिजली से चलने वाले आधुनिक पावरलूम भी दिनरात दौड़ते हैं। प्रधानमंत्री के स्वदेशी के आह्वान पर यहां के बुनकरों और व्यापारियों ने चीनी माल और मशीनरी से तौबा कर ली है।

यहां चीन से आयातित पावरलूम पर ही अधिकांश काम होता है, जिसे अब इन्होंने न कह दिया है। अब चीन को इसके लिए यहां से एक भी ऑर्डर नहीं मिलने पाएगा। चीनी पावरलूम की जगह अब मेड इन इंडिया पावरलूम पर ही कपड़ा बनाएंगे।

बुरहानपुर में शहरी क्षेत्र व उद्योगनगर में स्थापित करीब 50 हजार पावरलूमों से करीब दो लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। कई घरों में भी छोटे-छोटे पावरलूम संचालित हैं और पूरा परिवार भी इस व्यवसाय में जुटा रहता है। लॉकडाउन के कारण बुरी तरह से ठप हुए इस व्यवसाय ने हालही में धीमी रफ्तार पकड़ी है। करीब 70 हजार बुनकर और मजदूर शिफ्ट के हिसाब से रोजाना काम करते हैं।

बुरहानपुर टेक्सटाइल्स ट्रेडर्स वैलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्ण कन्हैया मित्तल और सचिव गोपाल दरगड़ ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए स्वदेशी आवश्यक है। वहीं भारत के सैनिकों पर चीन के हमले से बुरहानपुर के बुनकर, श्रमिक और व्यापारी भी बेहद नाराज हुए। तब यहां के उद्योगपतियों और सभी बुनकरों ने मिलकर यह निर्णय लिया कि अब चीनी माल और मशीनरी का नया ऑर्डर नहीं देंगे। पुराने पैंडिंग ऑर्डर को भी कैंसिल कर देंगे। अब तक जो चीनी पावरलूम लगे हैं, उन्हें छोड़कर नए सिरे से न तो कोई नया ऑर्डर देंगे और ना ही चीनी माल का उपयोग करेंगे। आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़कर अब सभी व्यापारी व बुनकर सिर्फ देसी पावरलूम पर ही काम करेंगे। मेड इन इंडिया पावरलूम से कपड़ा बनाएंगे। चीन से नए पावरलूम और मशीनरी नहीं बुलाएंगे, बल्कि भारत में ही बनने वाली मशीनरी और पावरलूम को बढ़ावा देंगे।

बुरहानपुर टेक्सटाइल्स व प्रोसेस एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश बजाज ने कहा कि अब स्वदेशी उत्पाद की ब्रांडिंग को भी बढ़ावा देंगे। बुरहानपुर पावरलूम बुनकर संघ के अध्यक्ष रियाज अहमद अंसारी ने बताया कि बुनकरों को भी इस बात का एहसास है कि अब चीनी माल का बहिष्कार ही देशहित में एक योदगान होगा।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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