अब टाटा ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन ने उठाए ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल, जांच की मांग
25 सितंबर को चैरिटी कमिश्नर और ग्रेटर मुंबई क्षेत्र के डिप्टी/असिस्टेंट चैरिटी कमिश्नर को भेजे गए एक ईमेल में सिंह ...और पढ़ें

अब टाटा ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन ने उठाए ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल
HighLights
पूर्व रक्षा सचिव ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर से ट्रस्ट के कामकाज के जांच की मांग की
बोले-टाटा संस में ट्रस्ट की बढ़ती दखलंदाजी से इसकी परोपकारी छवि पर होगा असर
एएनआई, नई दिल्ली। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) के ट्रस्टी और वाइस चेयरमैन और पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर से ट्रस्ट के कामकाज के जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि टाटा संस के वाणिज्यिक मामलों में ट्रस्ट की बढ़ती दखलंदाजी से ट्रस्ट की परोपकारी छवि खतरे में पड़ सकती है और इसकी संपत्तियों पर भारी टैक्स देनदारी आ सकती है।
25 सितंबर को चैरिटी कमिश्नर और ग्रेटर मुंबई क्षेत्र के डिप्टी/असिस्टेंट चैरिटी कमिश्नर को भेजे गए एक ईमेल में सिंह ने टाटा संस बोर्ड में नामित निदेशकों के स्वतंत्र रूप से फैसला लेने में भी दखल देने की मांग की।
बता दें कि एक और ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने भी चैरिटी कमिश्नर को ऐसा ही एक पत्र लिखा है, जिसमें ट्रस्ट के गवर्नेंस और टाटा संस के मामलों में ट्रस्ट की दखलंदाजी पर चिंता जताई गई है।
विजय सिंह ने लिखा, "टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के वाणिज्यिक और रणनीतिक मामलों में एसडीटीटी और टाटा ट्रस्ट्स की बढ़ती दखलंदाजी एक गंभीर चिंता का विषय है।'
विजय सिंह ने कहा कि एसडीटीटी एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट है और टाटा संस में वह बड़ा शेयरधारक है, इसलिए उसे वाणिज्यिक कामकाज नहीं करना चाहिए और होल्डिंग कंपनी के कामकाज में दखल नहीं देना चाहिए।
विजय सिंह ने 17 सितंबर की टाटा ट्रस्ट की दो प्रेस रिलीज का जिक्र किया, जिसमें टाटा संस को सूचीबद्ध करने के विकल्प और शापूरजी पलोनजी (एसपी) समूह को नकदी देने का प्रस्ताव किया गया था। उनके ई-मेल के मुताबिक, पहली रिलीज में लिखा था कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने जुलाई 2025 में यह तय किया था कि टाटा संस को सूचीबद्ध नहीं कराना चाहिए।
ट्रस्ट ने अपने फैसले से कंपनी को भी अवगत कराया है। दूसरी रिलीज में टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल एन टाटा द्वारा टाटा संस के बोर्ड के सामने एसपी समूह की शेयरहोल्डिंग के मोनेटाइजेशन के बारे में रखे गए प्रस्ताव का जिक्र किया था।
सिंह ने आरोप लगाया कि इन कामों से पता चलता है कि ट्रस्ट अपने चेयरमैन और संचालन टीम के जरिये टाटा संस से जुड़े वाणिज्यिक ट्रांजेक्शन की पहचान करने और उन्हें लागू करने में सीधी भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की भागीदारी से ट्रस्ट का आयकर पंजीकरण और छूट खतरे में पड़ सकती है और इससे उसकी परोपकारी स्थिति पर असर पड़ सकता है।
टाटा संस में दो कंपनियों के विलय के प्रस्ताव पर नहीं हुई कोई चर्चा
टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने यह भी कहा है कि टाटा संस में टाटा इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम्स और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स के विलय को लेकर किसी प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हुई है और न ही इसे मंजूरी दी गई है।
टाटा ट्रस्ट्स ने सोमवार को कहा था कि उसने टाटा संस में इन दो कंपनियों के विलय का प्रस्ताव दिया है। अगर ऐसा होता है तो इससे टाटा संस की परिचालन आय बढ़ेगी और उसे एक शुद्ध निवेश कंपनी के तौर पर आरबीआई की निगरानी से बाहर निकलने और सूचीबद्धता से बचने में मदद मिलेगी।
