जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नौ हाईवे परियोजनाओं के मौद्रीकरण से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की रकम जुटाने के बाद सरकार अब 25 और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के टोल वसूली के ठेके देकर 20 हजार करोड़ रुपये की अग्रिम राशि हासिल करने पर विचार कर रहा है।

एनएचएआइ के एक अधिकारी के अनुसार, लगभग 1640 किलोमीटर कुल लंबाई वाली इन 25 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के टीओटी ठेकों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो रही हैं। इनके ठेके तीन चरणों में दिए जाएंगे। अगले महीने से इसकी शुरुआत होगी। परियोजनाओं को निवेशकों के लिए और आकर्षक बनाने के इरादे से सरकार नेटवर्क सर्वेक्षण के अलावा ड्रोन कैमरों के जरिए इनकी हालत का वीडियो बनवा रही है।'

ये हाईवे परियोजनाओं में कुल 1000 किलोमीटर लंबाई वाले दूसरे व तीसरे चरण के ठेके मई में दिए जाएंगे, जबकि 640 किलोमीटर के चौथे चरण का ठेका जून अथवा जुलाई में दिए जाने की संभावना है। प्रत्येक चरण से लगभग एक अरब डालर का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। इस तरह तीनों चरणों से कुल तीन अरब डालर की कमाई होने की संभावना है।

ये पच्चीसों परियोजनाएं नौ राज्यों में बिखरी हुई हैं। सबसे पहले ओडिशा और पश्चिम बंगाल की परियोजनाओं के लिए बोलियां आमंत्रित की जाएंगी। उसके बाद राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु तथा तेलंगाना का नंबर आएगा। जबकि उत्‍तर प्रदेश, बिहार तथा झारखंड की सड़कों के टीओटी ठेके सबसे आखिर में उठाए जाएंगे।

सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि कुल मिलाकर 105 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के टोल वसूली के ठेके देने का उसका इरादा है। इस तरह कुल डेढ़ लाख करोड़ रुपये की रकम जुटने की उम्मीद है।

राजमार्गो के मौद्रीकरण की टीओटी (टोल, आपरेट एंड ट्रांसफर) योजना को सरकार ने 2016 में मंजूरी दी थी। इसके बाद एनएचएआइ ने अक्टूबर, 2017 में 9 राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित की थी। अंतत: 28 फरवरी को आस्ट्रेलिया की कंपनी मकोरी ने 9681.5 करोड़ रुपये की सर्वोच्च बोली लगाकर वह ठेका हासिल कर लिया था। इन नौ परियोजनाओं का संबंध आंध्र प्रदेश और गुजरात के राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों से है।

टीओटी मॉडल के तहत अभी तक 75 तैयार और चालू राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों की पहचान नीलामी के लिए की जा चुकी है। टीओटी के तहत पूरी तरह बन चुकी सड़कों पर टोल वसूली के ठेके निजी कंपनियों को देकर उनसे एकमुश्त अग्रिम रकम वसूली जाती है। इस तरह प्राप्त रकम का उपयोग नई सड़क परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जाता है। टीओटी ठेके अमूमन 30 साल के लिए दिए जाते हैं।

By Jagran News Network