जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रस्तावित नई शिक्षा नीति फिलहाल अब नए साल में ही आएगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नीति को इस साल लाने का इरादा टाल दिया है। हालांकि इससे पहले कैबिनेट से मंजूरी लेना जरूरी है, लेकिन इसके लिए भी अभी कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है। यह सारी स्थिति उस समय है, जब मंत्रालय ने नई सरकार के गठन के बाद अपने सौ दिनों के काम के एजेंडे में इसे शामिल किया गया था, जिसमें नीति को इसी साल लाया जाना था। शुरूआत के कुछ महीनों में इसे लेकर तेजी भी दिखाई गई, लेकिन बाद में मंत्रालय ने भी इस पर लंबी चुप्पी ओढ़ ली थी।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नीति के अंतिम मसौदे पर लगाई मुहर

इस बीच प्रस्तावित नई शिक्षा नीति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बुधवार को साफ किया है, कि प्रस्तावित नीति को अंतिम रुप दे दिया गया है। बावजूद इसके अब नए साल में ही लाया जाएगा। खासबात यह है कि मंत्रालय ने यह स्थिति उस समय स्पष्ट की है, जब हाल ही में संसद में नई शिक्षा नीति को लेकर किए गए सवालों पर मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया था कि नई शिक्षा नीति को अंतिम रुप देने का काम अभी चल रहा है।

नीति का प्रस्तावित मसौदा 31 मई को मंत्रालय को सौंपा गया था

गौरलतब है कि प्रस्तावित नीति के मसौदे को इसरो के पूर्व प्रमुख के. कस्तूरीरंगन की अगुवाई वाली एक टीम ने तैयार किया था। जिसे नई सरकार के गठन के बाद 31 मई को मानव संसाधन विकास मंत्री को सौंपा गया था। बाद में इस पर देश भर से सुझाव लिए गए थे। जिसमें दो लाख से ज्यादा सुझाव आए थे। मंत्रालय ने इन्हें परखने के बाद नीति को अंतिम रुप दिया है।

नीति में प्राथमिक शिक्षा से उच्च शिक्षा तक में बदलाव की सिफारिश

नीति में शिक्षा में बड़े बदलावों को सिफारिश की गई है। यह प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक को शामिल किया गया है। इनमें प्राथमिक शिक्षा के ढांचे को बदलने की भी सिफारिश है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा में भारत को नालंदा और तक्षशिला जैसी ऊंचाई पर ले जाने का भी रोडमैप तैयार किया गया है। इसके लिए तहत उच्च शिक्षा के ग्रास एनरोल्डमेंट रेशियो (जीएआर) को 26 से बढ़ाकर 50 फीसद करने का लक्ष्य तय किया गया है।

 

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