मेरठ [संतोष शुक्ल]। कृषि वैज्ञानिकों ने ग्रह-नक्षत्रों की गति पर आधारित बायोडाइनैमिक खेती की पहल की है। इसके तहत शुक्ल पक्ष में बोआई और कृष्ण पक्ष में फसल की कटाई-मड़ाई को काफी लाभदायक पाया गया है। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा व पृथ्वी के बीच दूरी कम होने से हवा में नमी होती है। इससे बीज का अंकुरण तेजी से होता है। इस दौरान मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी काफी बढ़ जाती है। देश में बायोडाइनैमिक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विभाग गांवों में पहुंच किसानों को इसका प्रशिक्षण दे रहा है।

पूर्णिमा से दो दिन पहले बरसता है अमृत

मेरठ का कृषि रक्षा विभाग भी किसानों को बायोडाइनैमिक खेती-बाड़ी का गणित बता रहा है। हापुड़ के अनवरपुर समेत मेरठ के दर्जनों गांवों में किसानों को इसका प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उत्तर प्रदेश कृषि एवं उद्यान विभाग ने अपनी वेबसाइट में बायोडाइनैमिक खेती के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई है। कृषि रक्षा विभाग के अनुसार, पूर्णिमा से दो दिन पहले बोआई के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है। इस दौरान पृथ्वी चांद के सबसे करीब होती है।

पृथ्वी पर चुंबकीय बल पड़ने से समुद्र में ज्वार-भाटा बनता है। वायुमंडल में आर्द्रता ज्यादा होने से पौधों का अंकुरण तेजी से होता है। मिट्टी की उर्वराशक्ति की जांच की गई तो यह सूक्ष्म पोषक जीवाणुओं से लबालब मिली। इसी प्रकार, वैज्ञानिकों ने पाया कि कृष्ण पक्ष यानी अंधियारा पक्ष में चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी ज्यादा होती है। वायुमंडल में शुष्कता बढ़ने से फसलों में नमी खत्म होती है। इसे कटाई एवं मड़ाई का सर्वश्रेष्ठ समय बताया गया है। इन दोनों फार्मूलों से उपज बढ़ती है।

चांदनी रात में गोबर बनेगा अमृत

उपनिदेशक कृषि रक्षा विभाग शैलेंद्र कुमार ने बताया कि कृष्ण पक्ष में गाय के सींग (मृत गाय की देह से प्राप्त) में दुधारू गाय का गोबर डालकर सींग का नुकीला भाग ऊपर रखते हुए इसे किसी छायादार व ऊंची जगह पर 25-30 सेमी गड्ढा बना छह माह के लिए गाड़ देना चाहिए।

मसलन, सितंबर में गाड़कर मार्च में निकालें। उसके बाद इससे निकली खाद को मटके में रख लें। बोआई के दौरान इसका घोल बनाकर (250 ग्राम की मात्रा 250 लीटर पानी में) छिड़काव करने से भूमि की उर्वरा शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। इसे बायोडाइनैमिक उत्प्रेरक कहते हैं।

एक दूसरे फार्मूले में गाय के सींग में सिलिका भरकर छह माह के लिए जमीन में गाड़ने से ग्रोथ हार्मोंस पैदा हो जाते हैं। शुक्ल पक्ष में इस रसायन का पौधों पर छिड़काव करने से फसलें तेजी से बढ़ती हैं।

किसान चंद्रमा की गति के मुताबिक कैलेंडर बनाएं। शुक्ल पक्ष में बुआई और कृष्ण पक्ष में कटाई करें। कई अन्य ग्रह नक्षत्र भी उत्पादन को प्रभावित करते हैं। कीटनाशकों एवं खाद से मुक्ति पाने के लिए किसानों को चांद की गति पर आधारित खेती की सीख दी जा रही है।

- शैलेंद्र कुमार, उपनिदेशक, कृषि रक्षा

मैंने नक्षत्रों के आधार पर खेती शुरू कर दी है। शुक्ल पक्ष में बुआई का बढ़िया नतीजा दिख रहा है।

- प्रीतम सिंह, किसान, बहादुरपुर

हर महीने रखें ध्यान

हर महीने की एक तारीख को जिस पर चांद और शनि विपरीत दिशा में आते हैं, उसे कृषि कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ पाया गया है। वहीं, हर माह दो बार चंद्रमा पृथ्वी के पथ से गुजरते हुए सूर्य के पथ को काटता है, इसे राहु और केतु काल से जाना जाता है। ये दिन किसी भी कृषि कार्य हेतु उपयुक्त नहीं होते।

By Sanjay Pokhriyal