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हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण से गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा, नोबेल विजेता बैरी मार्शल ने समय पर उपचार पर दिया जोर

Published: Sun, 04 Oct 2026 10:40 PM (IST)

नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. बैरी मार्शल ने बताया कि हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण गैस्ट्रिक कैंसर का जोखिम बढ़ाता है। उन्होंने इस ...और पढ़ें

हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण से गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण से गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

HighLights

  1. हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण गैस्ट्रिक कैंसर का जोखिम बढ़ाता है।

  2. नोबेल विजेता डॉ. बैरी मार्शल ने समय पर उपचार पर जोर दिया।

  3. पीवाई टेस्ट से पाइलोरी संक्रमण का 15 मिनट में पता चलता है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हेलिकोबैक्टर पाइलोरी का संक्रमण गैस्ट्रिक या पेट के कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है। नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. बैरी मार्शल ने कहा है कि इस बैक्टीरिया के संक्रमण को समय रहते पहचानकर उसका प्रभावी इलाज करने से गैस्ट्रिक कैंसर का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने पेट के कैंसर की रोकथाम के लिए पाइलोरी संक्रमण की जांच और समय पर उपचार पर जोर दिया।

मार्शल ने राबिन वारेन के साथ 2005 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार मिला था। उन्हें यह पुरस्कार ‘एच पाइलोरी’ की खोज और गैस्ट्राइटिस तथा अल्सर रोग में इसकी भूमिका के बारें में शोध के लिए दिया गया था। ‘हेलिकोबैक्टर पाइलोरी’ पेट और छोटी आंत की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाता है। इसके कारण पेट में सूजन, जलन और दर्द हो सकता है, जो आगे चलकर अल्सर या घाव का रूप ले लेता है।

मार्शल ने कहा, एच. पाइलोरी केवल अल्सर पैदा करने वाला बैक्टीरिया नहीं है। अगर यह संक्रमण कई वर्षों तक बना रहता है, तो यह पेट में लंबे समय तक सूजन पैदा कर सकता है और आमाशय के कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। यह कैंसर का ऐसा संभावित कारण है, जिसे रोका जा सकता है।

मार्शल राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलाजी (डब्ल्यूसीओजी 2026) में शामिल होने भारत आए थे। भारत में पहली बार आयोजित यह कार्यक्रम तीन अक्टूबर को संपन्न हुआ है।

मार्शल ने कहा, संक्रमित लोगों की पहचान कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संक्रमण को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रभावी उपचार मिले। उन्होंने एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल पर भी चिंता जताई।

मार्शल ने कहा, भारत में एच. पाइलोरी से संक्रमित लोगों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए यह शोध के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। हमें समझने की जरूरत है कि कौन-कौन से स्ट्रेन फैल रहे हैं और जांच तथा उपचार लोगों तक कैसे सुलभ बनाया जा सकता है।

मार्शल ने पीवाई टेस्ट का भी आविष्कार किया है, जो सी14 यूरिया ब्रेथ टेस्ट है। यह मरीज के सांस के सैंपल का इस्तेमाल कर मौजूदा पाइलोरी संक्रमण का पता लगाने का 15 मिनट का तरीका है। पीवाई टेस्ट भारत में पाइलोरियम डॉ. यग्नोस्टिक्स के जरिये उपलब्ध है। यह ट्राइमेड ऑस्ट्रेलिया का हिस्सा है, जिसे डॉ. मार्शल ने शुरू किया था और भारत में भानु राहनी इसके प्रमुख हैं।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)