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'कर्ज वसूली के नाम पर मनमानी नहीं', वाहन जब्ती पर सुप्रीम कोर्ट ने RBI को दिए सख्त निर्देश

Published: Thu, 17 Sep 2026 02:00 AM (IST)

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि वित्तीय संस्थान किसी भी नागरिक को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के उसकी आजीविका से वंचित नहीं कर सकते।

'कर्ज वसूली के नाम पर मनमानी नहीं', वाहन जब्ती पर RBI को दिए सख्त निर्देश

'कर्ज वसूली के नाम पर मनमानी नहीं', वाहन जब्ती पर RBI को दिए सख्त निर्देश

HighLights

  1. बलपूर्वक वाहन जब्त किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट का बेहद कड़ा रुख

  2. गरीब ट्रक मालिक को न्याय, वित्त कंपनी को मिला मुआवजे का आदेश

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि वह सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा वाहन जब्ती के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करे।

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि वित्तीय संस्थान किसी भी नागरिक को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के उसकी आजीविका से वंचित नहीं कर सकते।

यह महत्वपूर्ण फैसला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने हरिदत्त शर्मा नामक एक ट्रक मालिक की याचिका पर सुनाया। मामला एक छोटे ट्रांसपोर्टर का है, जिसने रोजी-रोटी कमाने के लिए चोलामंडलम इनवेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड से टाटा एसएफसी 407 ट्रक खरीदने हेतु कमर्शियल लोन लिया था।

उसने कुल 10.40 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था, जिसमें से 9.36 लाख रुपये वितरित किए गए थे और बाद में 1.04 लाख रुपये का अतिरिक्त ऋण दिया गया था।

किस्तों के भुगतान में कुछ चूक होने के बाद, 9 अप्रैल 2023 की सर्द रात को ठीक एक बजे चार अज्ञात लोग आए। उन्होंने बिना कोई पूर्व नोटिस दिए वाहन का स्टीयरिंग लाक तोड़ा और ट्रक को बलपूर्वक उठाकर ले गए।

इस अमानवीय हरकत ने एक गरीब नागरिक से उसकी आजीविका का एकमात्र साधन छीन लिया। इसके बाद, कंपनी ने उस ट्रक को 31 अगस्त 2023 को मात्र 4.5 लाख रुपये में बेच भी दिया और उल्टे 5.71 लाख रुपये बकाया बताकर प्रताड़ित करने लगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद पीड़ित ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस असंवेदनशीलता पर गहरी नाराजगी जताई। बेंच ने कहा कि आरबीआई द्वारा समय-समय पर जारी मास्टर सर्कुलर और दिशानिर्देश केवल कागजों तक सीमित हैं और केंद्रीय बैंक ने इनके क्रियान्वयन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

कोर्ट ने आदेश दिया कि आरबीआई प्रभावी कदम उठाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, जहां कोई नागरिक आधी रात को बिना नोटिस और बिना किसी कानूनी रास्ते के अपनी आजीविका खो बैठे।

सुप्रीम कोर्ट ने चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी को निर्देश दिया कि वह पीड़ित का लोन अकाउंट तुरंत बंद करे। इसके अलावा, वाहन की बिक्री से मिले 4.5 लाख रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस लौटाए जाएं।

अवैध जब्ती के कारण हुई मानसिक प्रताड़ना और रोजी-रोटी छिनने के दर्द के एवज में 10 लाख रुपये का मुआवजा तथा 50 हजार रुपये मुकदमे की लागत के रूप में देने का आदेश भी दिया गया।

कोर्ट ने कहा कि स्व-सहायता जब्ती के अनुबंध का अर्थ यह कतई नहीं है कि वित्तीय संस्थान रात के अंधेरे में ताकत के बल पर संपत्ति हड़पने का लाइसेंस प्राप्त कर लें।