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कैंसर-रोधी प्रमुख दवाओं की एमआरपी सूची जारी, कीमतों में कोई बदलाव नहीं, लेकिन लाखों में बनी हुई है मूल लागत

Published: Fri, 30 Oct 2026 07:16 AM (IST)

एलेकेंसा ब्रांड नाम से बिकने वाली एलेक्टिनिब 150 मिलीग्राम की कीमत 4,30,696 रुपये बनी हुई है। इसी तरह, कीट्रूडा नाम ...और पढ़ें

एमआरपी सूची में कैंसर-रोधी प्रमुख दवाओं के मूल्य में कोई बदलाव नहीं (सांकेतिक तस्वीर)

एमआरपी सूची में कैंसर-रोधी प्रमुख दवाओं के मूल्य में कोई बदलाव नहीं (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. लाखों रुपये में है इन प्रमुख दवाओं की कीमतें

  2. इनमें फेफड़े, स्तन व ब्लड कैंसर की दवाएं शामिल

एएनआई, नई दिल्ली। नौ नवंबर, 2026 से लागू होने वाली गैर-अनुसूचित कैंसर-रोधी दवाओं की संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) सूची में कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी सहित कैंसर की प्रमुख दवाओं की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इनमें फेफड़ों के कैंसर, स्तन कैंसर, ब्लड कैंसर और बोन मैरो से जुड़ी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई पेटेंट दवाएं शामिल हैं।

एलेकेंसा ब्रांड नाम से बिकने वाली एलेक्टिनिब 150 मिलीग्राम की कीमत 4,30,696 रुपये बनी हुई है। इसी तरह, कीट्रूडा नाम से बिकने वाली इम्यूनोथेरेपी की दवा पेम्ब्रोलिजुमैब 100 मिलीग्राम की कीमत 2,16,500 रुपये पर कायम है।

टैग्रिसो नाम से बिकने वाली ओसिमर्टिनिब 80 मिलीग्राम की कीमत 1,38,830.83 रुपये बनी हुई है, जबकि फेस्गो नाम से बेची जाने वाली पर्टुजुमैब और ट्रैस्टुजुमैब 1200 मिलीग्राम की कीमत में भी बदलाव नहीं हुआ है। यह 4,93,266 रुपये है।

कैंसर के मरीजों के लिए ये दवाएं अहम हैं, क्योंकि इलाज में अक्सर कई चरण होते हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। इनमें से कुछ दवाएं कैप्सूल के रूप में उपलब्ध हैं, जबकि अन्य इंजेक्शन के रूप में दी जाने वाली बायोलाजिकल दवाएं हैं।

प्रमुख दवाओं की कीमतें अपरिवर्तित

फेफड़ों, स्तन, ब्लड कैंसर और बोन मैरो संबंधी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली पेटेंट दवाओं की कीमतें पहले जैसी बनी हुई हैं।

– एलेसेन्सा (एलेक्टिनिब 150 mg): 4,30,696 रुपये की
– ट्रूडा (पेम्ब्रोलिज़ुमैब 100 mg): 2,16,500 रुपये
– टैग्रिसो (ओसिमर्टिनिब 80 mg): 1,38,830.83 रुपये
– फेस्गो (पर्टुज़ुमैब + ट्रास्टुज़ुमैब 1200 mg): 4,93,266 रुपये

एक वर्ष से कम शेष अवधि वाली दवाओं के आयात पर रोक

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक वर्ष से कम शेष शेल्फ लाइफ यानी एक वर्ष से कम एक्सपायरी डेट वाली दवाओं के आयात पर रोक लगा दी है।

मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा, लाइसेंसिंग प्राधिकरण आयात की तिथि पर एक वर्ष से कम शेष शेल्फ लाइफ वाली किसी भी दवा के आयात की अनुमति नहीं देगा।

हालांकि, सरकार ने जैविक दवाओं और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के लिए अलग प्रविधान किया है। इसके तहत उत्पाद के लेबल पर प्रदर्शित 60 प्रतिशत शेल्फ लाइफ की अनुमति दी जा सकती है।