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गंगा और अन्य नदियों को प्लास्टिक मुक्त बनाने की तैयारी, त्योहारों और धार्मिक मेलों में होगी विशेष निगरानी; नया प्रोटोकॉल जारी

Published: Sun, 11 Oct 2026 11:04 PM (IST)

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने नदियों में प्लास्टिक प्रदूषण, विशेषकर बड़े कचरे की निगरानी के लिए एक नया प्रोटोकॉल जारी किया है।

नदियों में प्लास्टिक प्रदूषण निगरानी के लिए नया प्रोटोकॉल जारी

नदियों में प्लास्टिक प्रदूषण निगरानी के लिए नया प्रोटोकॉल जारी

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने नदियों में प्लास्टिक प्रदूषण, विशेष रूप से बड़े प्लास्टिक कचरे की निगरानी के लिए प्रोटोकॉल तैयार किया है। इसका उद्देश्य तुलनीय आंकड़े जुटाना, प्रदूषण के प्रमुख केंद्रों की पहचान करना और लक्षित उपायों में मदद करना है।

कुंभ मेले, छठ पूजा, दुर्गा पूजा और कांवड़ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक, सांस्कृतिक और जनसमूहों वाले आयोजनों के दौरान नदियों में पहुंचने या जमा होने वाले अतिरिक्त प्लास्टिक का आकलन करने के लिए विशेष निगरानी की जाएगी। इन आयोजनों में जुटाए आंकड़ों को नियमित निगरानी से अलग दर्ज व विश्लेषित किया जाएगा।

यह प्रोटोकॉल महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकार के पास जल गुणवत्ता, जल विज्ञान, तलछट, मत्स्य पालन और जैव विविधता की निगरानी के लिए अलग-अलग रूपरेखाएं हैं, लेकिन दस्तावेज में कहा गया है कि नदी के प्लास्टिक प्रदूषण के आकलन के लिए अब तक कोई 'प्रमुख रूपरेखा' नहीं थी।

नमूने लेने, विश्लेषण और रिपोर्टिंग की एक समान पद्धति नहीं होने के कारण विभिन्न एजेंसियों के आंकड़े बिखरे हुए और एक-दूसरे से अतुलनीय रहे हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की 2016 के क्रियान्वयन पर वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल करीब 41.3 लाख टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। इसका बड़ा हिस्सा इकट्ठा नहीं हो पाता या उसका उचित प्रबंधन नहीं किया जाता, जिससे वह नदियों में पहुंचता है। प्रोटोकॉल में शुरुआती निगरानी के लिए 25 मिलीमीटर से बड़े प्लास्टिक कचरे को चुना गया है।

नदियों में प्लास्टिक प्रदूषण का यह सबसे अधिक दिखाई देने वाला रूप है। इसका संबंध पैकेजिंग, थैलियों और मछली पकड़ने के उपकरणों जैसे पहचाने जा सकने वाले स्रोतों से होता है। प्रोटोकॉल में निगरानी के तीन पूरक तरीके तय किए गए हैं। स्थानीय समुदायों के मछली पकड़ने के काम के दौरान कचरा इकट्ठा करना, बैराज और कचरा रोकने वाली संरचनाओं जैसे कृत्रिम अवरोधों पर निगरानी करना और नावों से वैज्ञानिक तरीके से जाल खींचकर सर्वेक्षण करना।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 25 सितंबर को यहां भारत मंडपम में ‘नदी में बड़े प्लास्टिक कचरे की निगरानी का प्रोटोकॉल’ जारी किया था। इसमें सीपीसीबी, केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय, स्वच्छ गंगा के लिए राज्य मिशनों और शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों ने तकनीकी सुझाव दिए हैं।

फिलहाल निगरानी पानी की सतह पर मौजूद बड़े प्लास्टिक कचरे पर केंद्रित है। इसमें जल स्तंभ, तलछट और जीव-जगत के आकलन का दायरा बढ़ाने के प्रविधान भी हैं। मछली पकड़ने पर आधारित तरीके में जाल में फंसे दिखाई देने वाले प्लास्टिक को इकट्ठा किया जाता है।

कृत्रिम अवरोधों वाले तरीके में बैराज, पुलों व कचरा रोकने वाली संरचनाओं जैसे तय स्थानों पर जमा होने वाले प्लास्टिक को मापा जाता है। वहीं, नाव से जाल खींचने के तरीके से पानी पर तैरते प्लास्टिक की मात्रा और उसके परिवहन का मानकीकृत अनुमान मिलता है।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)