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'E20 फ्यूल के खिलाफ पेड कैंपेन चलाया गया था...', नितिन गडकरी का बड़ा दावा

Published: Tue, 27 Oct 2026 02:50 PM (IST)

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने E20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों को 'पेड कैंपेन' बताया है।

नितिन गडकरी ने E20 के विरोध को पेड कैंपेन बताया

नितिन गडकरी ने E20 के विरोध को पेड कैंपेन बताया

HighLights

  1. गडकरी ने E20 इथेनॉल विरोध को 'पेड कैंपेन' बताया।

  2. सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को E100 पर चलने की अनुमति दी।

  3. कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना, पर्यावरण लाभ मुख्य उद्देश्य।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों को सीधे तौर पर एक पेड कैंपेन करार दिया है।

गडकरी का यह बयान केंद्र सरकार द्वारा मोटर वाहन नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी करने के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसके तहत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को शत प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण पर चलने की अनुमति दी गई है।

तीन महीने पहले हुआ था हंगामा-गडकरी

उद्योग संगठन सीआईआई ने आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि E20 ईंधन को लेकर कुछ समय पहले सुनियोजित तरीके से माहौल बनाया गया था।

समाचार एजेंसी PTI के अनुसार गडकरी ने कहा, 'तीन महीने पहले E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) ईंधन के खिलाफ काफी हंगामा किया गया था। अब E20 ईंधन के खिलाफ वह गुस्सा पूरी तरह शांत हो चुका है... यह एक पेड कैंपेन था।'

नितिन गडकरी ने दोहराते हुए कहा देश की कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने के लिए वैकल्पिक ईंधनों का प्रसार जरूरी है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल के व्यापक इस्तेमाल से न सिर्फ पर्यावरण को लाभ होगा बल्कि भारत की कीमती विदेशी मुद्रा की भी भारी बचत होगी।

सरकार ने जारी की नई अधिसूचना

सरकार ने सोमवार को 'केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989' में संशोधन की अधिसूचना जारी की, जिससे ऐसे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अनुमति मिल गई जो E100 (यानी लगभग शुद्ध इथेनॉल) तक के ईंधन पर चल सकते हैं।

क्या था E20 को लेकर विवाद?

केंद्र सरकार द्वारा देशभर में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लागू करने के फैसले के बाद इस साल की शुरुआत में विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक आलोचनाएं शुरू हो गई थीं।

वाहन मालिकों ने माइलेज कम होने और पुराने वाहनों में इस ईंधन के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई थी। विपक्षी दलों ने भी अप्रैल 2025 से पूरे देश में पेट्रोल पंपों पर E20 को मानक ईंधन बनाने के निर्णय पर सवाल उठाए थे

यह विवाद तब और बढ़ गया जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने E20 को एक प्रयोग बताया और कहा कि इसके नतीजे अगले साल पता चलेंगे। उनका यह बयान वायरल हो गया, जिसके बाद इस नीति की फिर से अलोचना होने लगी।

बाद में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि अटॉर्नी जनरल इथेनॉल की आपूर्ति की मात्रा के संदर्भ में बात कर रहे थे, न कि E20 नीति को ही कोई प्रयोग बता रहे थे। वेंकटरमणी ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को यह भी बताया कि उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया था।

सरकार और ऑटोमोबाइल उद्योग ने ऐसे अध्ययनों का हवाला दिया है जिनसे पता चलता है कि E20 से इंजन के धातु वाले पुर्जों को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचता है, हालांकि उन्होंने यह भी माना है कि अलग-अलग वाहनों में ईंधन दक्षता और अनुकूलता अलग-अलग हो सकती है।

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