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'हर चीज पर सब्सिडी नहीं दे सकती सरकार', UPI पर नीति आयोग ने क्यों किया चाणक्य नीति, 'मधुमक्खी और शहद' का जिक्र

Published: Wed, 16 Sep 2026 09:05 PM (IST)

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने यूपीआई पर मर्चेंट चार्ज का बचाव करते हुए चाणक्य नीति का हवाला दिया।

UPI चार्ज के बचाव में नीति आयोग।

UPI चार्ज के बचाव में नीति आयोग।

HighLights

  1. नीति आयोग ने यूपीआई मर्चेंट चार्ज लगाने के फैसले का बचाव किया।

  2. उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने चाणक्य नीति का हवाला दिया।

  3. ₹2000 से अधिक के मर्चेंट लेनदेन पर 0.4% शुल्क।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट चार्ज (MDR) लगाने के सरकार के फैसले पर देशभर में घमासान छिड़ा हुआ है। इसी बीच नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने इसका बचाव करते हुए अपना रुख साफ किया है।

लाहिड़ी ने प्राचीन भारतीय दार्शनिक आचार्य चाणक्य का हवाला देते हुए कहा कि जैसे एक भौंरा फूल को बिना नुकसान पहुंचाए उससे धीरे-धीरे शहद निकालता है, उसी तरह सरकार को भी बिना ज्यादा बोझ डाले व्यवस्था चलानी चाहिए। लाहिड़ी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार को बिना सब्सिडी दिए व्यवसायों को आत्मनिर्भर बनाने के रास्ते खोजने होंगे।

छोटे शुल्क से परेशानी क्यों नहीं?

लाहिड़ी ने 100 रुपये के लेनदेन का उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि 100 रुपये पर 40 पैसे (0.4%) का शुल्क देना पड़े और वह भी केवल बड़े ट्रांजैक्शन पर, तो इससे किसी को नुकसान नहीं होने वाला है। उन्होंने चेक बुक का उदाहरण देते हुए कहा कि जब बैंक से चेक बुक लेते हैं, तो उसके लिए भी पैसे चुकाए जाते हैं, जिससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

चाणक्य नीति का किया जिक्र

नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने चाणक्य के उस प्रसिद्ध श्लोक का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि राजा को नागरिकों से कर इस तरह वसूलना चाहिए जैसे भौंरा फूल से बिना उसे चोट पहुंचाए रस इकट्ठा करता है।

समझिए क्या है नया नियम और सरकार का पक्ष?

बता दें कि लगभग 6 वर्षों तक पूरी तरह मुफ्त रहने के बाद, सरकार ने 15 अक्टूबर से मर्चेंट को यूपीआई के जरिए किए जाने वाले 2000 रुपये से अधिक के भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत का शुल्क लागू किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह चार्ज आम ग्राहकों या छोटे लेन-देन पर नहीं लगेगा। रोजमर्रा के पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।

मामले में सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह फैसला यूपीआई इकोसिस्टम को मजबूत करने और उसकी सुरक्षा-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लिया गया है, ताकि डिजिटल पेमेंट सिस्टम लंबे समय तक टिकाऊ रह सके।