'IDBI बैंक की हालत बहुत खराब थी', राहुल गांधी के आरोप पर निर्मला सीतारमण का पलटवार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में राहुल गांधी के IDBI बैंक निजीकरण और टाटा समूह पर लगाए गए आरोपों का तीखा जवाब दिया है।

राहुल गांधी के आरोपों पर निर्मला सीतारमण का पलटवार।
HighLights
निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के आरोपों का जोरदार खंडन किया।
IDBI बैंक निजीकरण और टाटा समूह पर हुई तीखी बहस।
कांग्रेस पर बैंक की दुर्दशा का आरोप, NDA सरकार का बचाव।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण और विनिवेश को लेकर देश की सियासत में गर्माहट तेज है। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी सातवें आसमान पर है।
इसी बीच अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। बता दें कि यह पूरा विवाद IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री और टाटा समूह को लेकर दिए गए बयानों के बाद शुरू हुआ है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब हाल ही में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के उस फैसले का कड़ा विरोध किया था, जिसके तहत IDBI Bank को कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स को बेचने की तैयारी है। उन्होंने बैंक के कर्मचारियों के हितों, आरक्षण और सरकार की कम होती हिस्सेदारी को लेकर सवाल उठाए थे।
कांग्रेस का इतिहास बनाम मोदी सरकार
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा था कि कांग्रेस के समय में बैंक बनाए जाते थे, जबकि मोदी सरकार के समय में उन्हें बेचा जा रहा है। उन्होंने बैंक के मुनाफे में लौटने का श्रेय वहां के कर्मचारियों की कड़ी मेहनत को दिया था।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पलटवार
अब राहुल गांधी के इन आरोपों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने पिछले समय का उदाहरण देते हुए कांग्रेस की सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए।
वित्त मंत्री ने अपने पोस्ट में कहा कि जब उनकी सरकार आई थी, तब आईडीबीआई बैंक बेहद खराब हालत में था। कांग्रेस सरकारों के समय में राजनीतिक दबाव डालकर उन बड़े उद्योगपतियों को कर्ज बांटे गए, जिनके कांग्रेस नेताओं के साथ करीबी रिश्ते थे।
डूब गए थे पैसे- सीतारमण
वित्त मंत्री ने आगे वीडियोकॉन, विंसम, एबीजी शिपयार्ड और किंगफिशर जैसी कंपनियों का नाम लेते हुए कहा कि इनके कर्ज एनपीए बन गए थे, जिससे बैंक को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
वित्त मंत्री ने बताया कि एनडीए सरकार ने पेशेवर प्रबंधन, समझदारी भरे फैसलों और 25000 करोड़ रुपये से अधिक की रीकैपिटलाइजेशन के जरिए इस बैंक को फिर से उबारा और आज यह बैंक मुनाफे में है।
टाटा समूह के मुद्दे पर भी आमने-सामने
गौरतलब है कि यह विवाद अभी थमा भी नहीं था कि इससे दो दिन पहले वित्त मंत्री और राहुल गांधी के बीच 'टाटा समूह' को लेकर भी तीखी बहस हुई थी। राहुल गांधी ने दावा किया था कि भारतीय व्यवसायों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का 'खिलौना' बना दिया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि टाटा समूह को आपराधिक रूप से नष्ट किया जा रहा है और डर के मारे कोई उद्योगपति कुछ नहीं बोल रहा है।
निर्मला सीतारमण का जवाब
इस पर पलटवार करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश के मुख्य विपक्षी नेता को हर मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। व्यापारिक और कानूनी मामलों को 'अपराधिक' बताना पूरी तरह गलत है। उन्होंने राहुल गांधी पर भारतीय उद्योग जगत की सफलता को नीचा दिखाने और देश में अविश्वास फैलाने का आरोप लगाया।
