'दोधारी तलवार है एआई, भारत भुना रहा डेमोग्राफिक डिविडेंड', ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में बोलीं निर्मला सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को 'दोधारी तलवार' बताया, जो धोखाधड़ी में सहायक और हानिकारक दोनों हो सकता है।

दोधारी तलवार है एआई।
HighLights
एआई धोखाधड़ी का पता लगाने और करने दोनों में सक्षम।
इनोवेशन और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।
भारत अपनी युवा आबादी के जनसांख्यिकीय लाभ उठा रहा।
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को "दोधारी तलवार" बताया है। वित्त मंत्री ने चेताया कि एआई एक तरफ धोखाधड़ी का पता लगाने में मदद कर सकता है, वहीं इसका इस्तेमाल धोखाधड़ी करने के लिए भी किया जा सकता है।
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में सीतारमण ने एआई, साइबर खतरों से जुड़े जोखिमों के बारे में आगाह करते हुए यह भी कहा कि तकनीक समाज और यहां तक कि चुनावी नतीजों को भी प्रभावित कर सकती है। ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल में लगभग आठ हजार संगठनों ने हिस्सा लिया। इनमें 20 प्रतिशत फिनटेक कंपनियां, 25 प्रतिशत वित्तीय संस्थान, 43 प्रतिशत टेक्नोलाजी से जुड़ी कंपनियां थीं।
सीतारमण ने कहा, हमारा मकसद न तो डर के कारण इनोवेशन को रोकना होना चाहिए और न ही रफ़्तार के चक्कर में सुरक्षा से समझौता करना। इसके बजाय, हमें बेकार की रुकावटों को उन जरूरी सुरक्षा उपायों, इंसानी निगरानी और सर्किट ब्रेकर से अलग करना होगा जो सिस्टम की सुरक्षा करते हैं। यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि इनोवेशन, सिस्टम की कार्यक्षमता बढ़ाए।
वित्त मंत्री ने कहा, एआई फैसले लेने में मदद कर सकता है, लेकिन जिम्मेदारी इंसानों और संस्थाओं की ही होनी चाहिए। रेगुलेटर्स, कंपनी बोर्ड और प्रबंधन को समझना चाहिए कि एआई का इस्तेमाल कहां हो रहा है, यह किन फैसलों पर असर डालता है, यह किस डाटा पर निर्भर करता है और अगर यह तकनीक असफल हो जाए तो क्या हो सकता है।
पीटीआई के अनुसार, सीतारमण ने आरबीआई से अपने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) पहल को और आगे बढ़ाने और डिजिटल रुपये के साथ अपनी क्षमताओं को बेहतर बनाने का आग्रह किया। उन्होंने एसआरओ-एफटी फ़्रेमवर्क के तहत 'यूनिफाइड फिनटेक फोरम' को आरबीआइ द्वारा सेल्फ-रेगुलेटरी आर्गनाइजेशन (एसआरओ) के तौर पर मान्यता दिए जाने का स्वागत किया।
सीतारमण ने कहा कि भारत के पहले टोकनाज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड के सफल पायलट प्रोजेक्ट ने यह दिखाया है कि सीबीडीसी किसी ट्रांजेक्शन में एसेट और पैसे दोनों के साथ लेन-देन को संभव बनाने में कितना महत्वपूर्ण है। टोकनाइजेशन से गैर-जरूरी बिचौलियों को हटाया जा सकता है और एसेट ट्रांसफर लगभग तुरंत किया जा सकता है।
एएनआई के अनुसार, सीतारमण ने सवाल उठाया कि एआई कंपनियां जो सुरक्षा उपाय विकसित कर रही हैं, क्या वे इस तकनीक में हो रही तेजी से तरक्की के साथ कदम मिलाकर चल पा रही हैं। उन्होंने एंथ्रोपिक के शोधार्थी जैकब काक्सन के हालिया इस्तीफे का भी जिक्र किया।
ओपनएआई और एंथ्रोपिक में एआई प्री-ट्रेनिंग रिसर्च पर काम करने वाले कॉक्सन ने इस सप्ताह इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा था कि बड़ी एआई कंपनियां जिम्मेदारी से काम नहीं कर रही हैं और खुद को बेहतर बनाने वाली सुपर-इंटेलिजेंस की होड़ में लगी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बिना ज़रूरी सुरक्षा उपायों के इस टेक्नोलाजी को विकसित किया गया, तो यह अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है।
'नाराज फूफा' पर साधा निशाना, कहा- भारत महसूस कर रहा जनसांख्यिकीय लाभ
वित्त मंत्री ने उन लोगों पर निशाना साधा जो भारत की विकास की रफ्तार पर सवाल उठाते हैं। वित्त मंत्री ने ऐसे लोगों की तुलना 'नाराज फूफा' से की जो भारत की आबादी में हो रही बढ़ोतरी को लगातार 'निराशावादी नजरिये से देखते हैं और असल आंकड़ों के बजाय 'वाइबकास्टिंग' (महसूस की गई धारणाओं) पर भरोसा करते हैं। सीतारमण ने कहा कि देश असल में 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' (कामकाजी उम्र की आबादी का लाभ) उठा रहा है।
सीतारमण ने कहा, कुछ टिप्पणीकारों को भारत की आबादी में हो रही बढ़ोतरी को हमेशा निराशावादी नजरिए से देखने की आदत है। वे टीवी स्टूडियो में इस बात पर बहस करने में अपना समय बिताते हैं कि क्या भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड हाथ से निकल गया है या बोझ बन गया है।
ऐसे आलोचक 21वीं सदी की आर्थिक महत्वाकांक्षा को 20वीं सदी के नजरिए से देख रहे हैं, लेकिन इस देश के युवाओं ने उनके निराशावादी सोच को पीछे छोड़ दिया है। युवा पीढ़ी नए उद्यम शुरू कर रही है और भारत का भविष्य गढ़ रही है।
