पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को स्कूलों से जोड़ने ‘NIOS मित्र’ की होगी तैनाती
शिक्षा मंत्रालय की पहल पर NIOS देश भर में 'NIOS मित्र' अभियान चलाएगा, जिसका उद्देश्य स्कूली शिक्षा से वंचित और 10वीं-12वीं फेल छात्रों को फिर से शिक्षा से जोड़ना है।

पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को स्कूलों से जोड़ने ‘NIOS मित्र’ की होगी तैनाती।
HighLights
देश भर में 'NIOS मित्र' की होगी तैनाती।
स्कूल छोड़ चुके व फेल छात्रों को जोड़ना लक्ष्य।
प्रोत्साहन राशि व फीस सहायता भी मिलेगी।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। 10वीं और 12वीं कक्षाओं में फेल हो चुके छात्रों के साथ ही अब स्कूली शिक्षा से दूर या फिर वंचित प्रत्येक आयु वर्ग के बच्चों की तलाश के लिए देश भर में अभियान चलेगा। शिक्षा मंत्रालय की पहल पर राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) राज्यों के साथ मिलकर इसकी तैयारी में जुटा है।
इसके तहत जल्द ही देश के सभी ब्लॉकों में ‘NIOS मित्र’ की तैनाती दी जाएगी, जो अपने ब्लॉक में स्कूली शिक्षा की उम्र में स्कूलों से दूर सभी बच्चों की पहचान करेगा। इनमें से जो बच्चे शिक्षा के अधिकार कानून के तहत राज्यों के स्कूलों में पढ़ने के लिए पात्र होंगे, उन्हें राज्य पढ़ाएंगे, बाकी बच्चों को, जिनमें दसवीं और बारहवीं के फेल छात्र भी होंगे, उन्हें NIOS के जरिए पढ़ाया जाएगा।
NIOS ने इस मुहिम को प्रोत्साहित करने के लिए एक इंसेंटिव प्लान भी तैयार किया है। इसमें ऐसे प्रत्येक बच्चे को प्रवेश दिलाने पर उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। फिलहाल इसे लेकर जो प्लान बनाया गया है, उनमें 49 प्रवेश दिलाने वाले NIOS मित्र को प्रत्येक प्रवेश पर 80 रुपए दिए जाएंगे।
वहीं 50 से 99 प्रवेश दिलाने पर प्रति प्रवेश सौ रुपए और सौ से डेढ़ सौ प्रवेश दिलाने पर उन्हें प्रति प्रवेश 120 रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की योजना है। यह खर्च केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी। इस स्कीम में जो छात्र आर्थिक रूप से कमजोर हैं उनकी फीस व पढ़ाई का खर्च भी केंद्र व राज्य मिलकर उठाएंगें। मंत्रालय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक NIOS मित्र की पहल अगले महीने से शुरू हो जाएगी।
यूपी सहित पांच राज्यों में होगा ट्रायल
इससे पहले उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, कर्नाटक और गुजरात के पांच ब्लाकों में NIOS की ओर से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है। इसे लेकर एक एप तैयार कराया गया है। इसके जरिये NIOS मित्र अपने काम को अंजाम देंगे। इनमें फिलहाल उत्तर प्रदेश के अयोध्या व श्रावस्ती जिले को शामिल किया गया है। बाकी राज्यों में जिलों के चयन की प्रक्रिया चल रही है।
इस अभियान के तहत 10वीं और 12वीं फेल हो चुके दो करोड़ बच्चों को स्कूलों से फिर से जोड़ने के साथ 2030 तक स्कूली शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात को शत-प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मौजूदा समय में 10वीं कक्षा तक आते-आते करीब 20 प्रतिशत बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं।
