मुंबई, प्रेट्र। देश के सबसे पुराने शोध रिएक्टर 'अप्सरा' को अधिक क्षमता के साथ फिर से शुरू किया गया है। इस रिएक्टर को मरम्मत के लिए 2009 में स्थायी तौर पर बंद कर दिया गया था।

भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर (बार्क) ने मंगलवार को बयान जारी कर बताया कि रिएक्टर को और उन्नत बनाने के बाद 10 सितंबर को फिर से शुरू किया गया है। इस रिएक्टर को सर्वप्रथम अगस्त 1958 में शुरू किया गया है।

अब तक इस शोध रिएक्टर का इस्तेमाल न्यूट्रॉन की गतिविधियों के विश्लेषण, विकिरण से होने वाले नुकसान के अध्ययन, फोरेंसिक शोध, न्यूट्रॉन रेडियोग्राफी में किया गया है।

रिएक्टर के अस्तित्व में आने के 62 साल बाद इसे उच्च क्षमता के साथ एक स्वीमिंग पूल प्रकार के शोध रिएक्टर की तरह अपग्रेड किया गया है। इसमें देश में ही निर्मित यूरेनियम से बनी प्लेटों का प्रयोग किया गया है, जिससे बहुत कम उत्सर्जन होगा।

उन्नत रिएक्टर चिकित्सा उपयोग के लिए रेडियो आइसोटोप के स्वेदशी उत्पादन में वृद्धि करेगा। उच्च न्यूट्रॉन प्रवाह के आधार पर, यह रिएक्टर चिकित्सा उपयोग में कम से कम 50 फीसद रेडियो आइसोटोप के उत्पादन में वृद्धि करेगा। वहीं इसका उपयोग न्यूक्लियर फिजिक्स, मैटीरियल साइंस और रेडिएशन से बचाव में भी किया जा सकेगा।

 

Posted By: Arun Kumar Singh