जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उदयपुर में कन्हैयालाल तेली की जघन्य हत्या के मामले में एनआइए ने आतंकी धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गृहमंत्री अमित शाह के निर्देश के बाद गृहमंत्रालय ने मामले की जांच एनआइए को करने को कहा है। एनआइए के अधिकारी घटना के तत्काल बाद मंगलवार की शाम को ही उदयपुर पहुंच गए थे और अब संयुक्त निदेशक के नेतृत्व में जांच दल ने उदयपुर में डेरा डाल दिया है। एनआइए के नए महानिदेशक दिनकर गुप्ता जांच की निगरानी कर रहे हैं।

किसी आतंकी संगठन का तो हाथ नहीं 

पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक दिनकर गुप्ता ने सोमवार को ही एनआइए के महानिदेशक का कार्यभार संभाला है। एनआइए के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उदयपुर के जघन्य हत्याकांड की जांच का दायरा सिर्फ हत्या करने वाले दो आरोपितों तक ही सीमित नहीं रहेगी। बल्कि यह भी देखा जाएगा कि इसके पीछे किसी आतंकी या कट्टरपंथी संगठन की भूमिका तो नहीं है। इसके साथ ही हत्या करने वाले रियाज अख्तरी और गौस मोहम्मद के अंतरराष्ट्रीय संपर्को की भी जांच की जाएगी।

कई लोग हो सकते हैं इस हत्‍याकांड में शामिल 

रियाज अख्तरी और गौस मोहम्मद को राजस्थान पुलिस ने मंगलवार को ही गिरफ्तार कर लिया था। एनआइए अब इन दोनों को अपनी हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी। एनआइए के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पूरे घटनाक्रम को देखने और मंगलवार को उदयपुर पहुंचे एनआइए के अधिकारियों से मिली जानकारी से साफ हो गया है कि रियाज अख्तरी और गौस मोहम्मद के अलावा अन्य कई लोग इस जघन्य हत्याकांड की साजिश में शामिल थे।

क्‍या किसी ने की थी दुकान की रेकी 

हत्‍याकांड में शामिल संदिग्‍धों में कन्हैयालाल तेली का घर और दुकान का पता उपलब्ध कराने वाले और हत्या के पहले दुकान की रेकी करने वाले भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और हत्याकांड में सभी आरोपितों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गृहमंत्रालय के आदेश मिलने के तत्काल बाद राजस्थान पुलिस की एफआइआर के आधार पर नई एफआइआर दर्ज की गई।

लगाई गई ये धाराएं  

एफआइआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 452, 302, 153(ए), 153(बी) 295(ए) और 34 के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून की धारा 16, 18 और 20 को शामिल किया गया है, जो आतंकी हमले और हत्या के साथ-साथ समुदायों में वैमनस्यता फैलाने, देश की अखंडता से खिलवाड़ करने से संबंधित हैं। एनआइए कानून गृह मंत्रालय को राज्य की सहमति के बिना भी किसी आतंकी घटना की जांच एनआइए को सौंपने का अधिकार देता है। 

दोषि‍यों को सजा दिलाने की चुनौती  

इस मामले में राजस्थान सरकार की ओर से एनआइए जांच के अनुरोध का इंतजार नहीं किया गया और त्वरित कार्रवाई करते हुए एनआइए को जांच शुरू करने को कह दिया गया। एनआइए महानिदेशक के रूप में दिनकर गुप्ता के लिए उदयपुर हत्याकांड की साजिश का पर्दाफाश करने और सभी दोषियों को सजा दिलाने की चुनौती होगी। यह पहला केस है, जो उनके महानिदेशक का कार्यभार संभालने के बाद एनआइए ने दर्ज किया है।

Edited By: Krishna Bihari Singh